Bihar News : बगहा में उद्घाटन के 8 साल बाद भी नहीं खुला अस्पताल, विधायक ने PHC प्रभारी को दी चेतावनी– 'सुधर जाएं वरना बाहर का रास्ता दिखाऊंगा'
BAGAHA : वाल्मीकिनगर के नवनिर्वाचित विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा जब बगहा-2 प्रखंड के आदिवासी बहुल लक्ष्मीपुर सौराहा स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्र (APHC) पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए। स्थानीय ग्रामीणों और मुखिया ने खुलासा किया कि यह सरकारी अस्पताल पिछले आठ वर्षों से बना हुआ है, लेकिन उद्घाटन के बाद से आज तक इसका ताला नहीं खुला। न कभी यहां डॉक्टर आए और न ही किसी मरीज का इलाज हुआ। अस्पताल की यह बदहाली देख माननीय का पारा चढ़ गया।
विधायक के तेवर तलख, प्रभारी को अल्टीमेटम
क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर विधायक ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC) डॉ. राजेश सिंह नीरज को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने दो टूक शब्दों में अल्टीमेटम देते हुए कहा कि "हालत सुधार लें और खुद भी सुधर जाएं, वरना बाहर का रास्ता देखना होगा।" विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकारी संसाधनों की ऐसी बर्बादी और जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बिना डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी के खंडहर बना केंद्र
यह उप-स्वास्थ्य केंद्र बगहा-2 प्रखंड मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर सुदूरवर्ती इलाके में स्थित है। स्थानीय लोगों ने विधायक को बताया कि केंद्र हमेशा बंद रहने के कारण उन्हें इलाज के लिए मीलों दूर जाना पड़ता है। विधायक ने औचक निरीक्षण के दौरान पाया कि चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी नियमित रूप से गायब रहते हैं, और जो आते भी हैं, वे समय का पालन नहीं करते। इस लापरवाही को लेकर विधायक ने कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया है।
आदिवासी बहुल क्षेत्र में आक्रोश
लक्ष्मीपुर सौराहा का यह क्षेत्र आदिवासी बहुल है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है। आठ सालों तक अस्पताल में ताला लटके रहने के मुद्दे पर स्थानीय मुखिया और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि विधायक के आने से अब उन्हें उम्मीद जगी है कि शायद इस खंडहरनुमा इमारत में अब डॉक्टरों की मौजूदगी दिखेगी और लोगों को दवा मिल सकेगी।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की सफाई
इस पूरे मामले पर जब मीडिया कर्मियों ने पीएचसी प्रभारी डॉ. राजेश सिंह नीरज से सवाल किया, तो उनके सुर बदले हुए नजर आए। विधायक की नाराजगी और अल्टीमेटम पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने रक्षात्मक रुख अपनाया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने कहा कि "अगर माननीय विधायक को दिक्कत है, तो जैसा वे कहेंगे वैसा ही सुधार किया जाएगा।" हालांकि, आठ साल तक अस्पताल बंद रहने के सवाल पर उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था।
नागेन्द्र की रिपोर्ट