Bihar Marine Drive: गंगा किनारे के 250 घर होंगे जमींदोज, आशियाना उजड़ने से खौफ में लोग, मरीन ड्राइव को लेकर तेज़ हुई सरकारी चाल

Bihar Marine Drive:जिस मार्ग से मरीन ड्राइव गुज़रेगी, वहां गंगा किनारे करीब ढाई सौ से अधिक मकान पहले से मौजूद हैं।...

250 Homes to Be Demolished on Ganga Bank for Marine Drive
गंगा किनारे के 250 घर होंगे जमींदोज- फोटो : social Media

Bihar Marine Drive: मरीन ड्राइव परियोजना को लेकर सियासी और प्रशासनिक सरगर्मियां अब तेज़ रफ्तार पकड़ चुकी हैं। मुंगेर से भागलपुर तक प्रस्तावित गंगा के तट पर विकास का ख़्वाब सजाने वाली यह महत्वाकांक्षी योजना जहां सरकार के लिए तरक़्क़ी और निवेश का प्रतीक बन रही है, वहीं आम लोगों के लिए चिंता, असमंजस और बेदख़ली का डर बनती जा रही है।

परियोजना को ज़मीन पर उतारने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। एक ओर गंगा किनारे विभिन्न स्थानों पर बोरवेल कर मिट्टी के सैंपल जुटाए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के निर्देश पर विशेषज्ञों की 12 सदस्यीय टीम नगर निगम अधिकारियों के साथ सर्वे में जुटी है। इसी कड़ी में माणिक सरकार घाट से लेकर बरारी पुल घाट तक प्रस्तावित मरीन ड्राइव रूट का गहन मुआयना किया गया।

सर्वे के दौरान जो सच्चाई सामने आई, उसने सियासी हलकों के साथ-साथ आम जनता की बेचैनी भी बढ़ा दी है। जिस मार्ग से मरीन ड्राइव गुज़रेगी, वहां गंगा किनारे करीब ढाई सौ से अधिक मकान पहले से मौजूद हैं। इसके अलावा बरारी रिवर फ्रंट घाट और इंटेकवेल जैसी अहम संरचनाएं भी इसी इलाके में हैं। ऐसे में तकनीकी आकलन के साथ-साथ प्रशासनिक फैसले भी बेहद नाज़ुक हो गए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि चिन्हित सभी मकानों की गहराई से जांच की जाएगी। जो मकान सरकारी ज़मीन पर बने पाए जाएंगे, उन्हें अतिक्रमण मानते हुए नोटिस जारी होगा और क़ानून के मुताबिक हटाया जाएगा। वहीं निजी ज़मीन पर बने मकानों को लेकर मुआवज़े की बात कही जा रही है, हालांकि इसकी राशि और पुनर्वास की नीति पर अभी पर्दा पड़ा हुआ है।

प्रशासन का लक्ष्य है कि मार्च तक सुल्तानगंज से सबौर तक पूरे रूट का सर्वे पूरा कर लिया जाए। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर संशोधन, फिर एनओसी और उसके बाद निर्माण की रफ्तार तेज़ होगी।

लेकिन गंगा किनारे रहने वालों के दिलों में सवाल है क्या विकास की इस सियासत में आम आदमी की छत महफूज़ रह पाएगी? माणिक सरकार घाट से लेकर आदमपुर और बरारी तक लोग आशंकित हैं। पेड़ों पर लगे निशान और मकानों पर मंडराता बुलडोज़र का साया यही पूछ रहा है कि मरीन ड्राइव तरक़्क़ी लाएगी या उजड़ने की दास्तान लिखेगी?

करीब 9,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना को अदाणी एंटरप्राइजेज द्वारा तैयार किया जाना है। व्यापार, पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से इसे ऐतिहासिक बताया जा रहा है, लेकिन इसके साथ जुड़े विस्थापन के सवाल आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन की नीयत की असली परीक्षा लेने वाले हैं।