Bihar Aguwani Ganga Bridge:सुल्तानगंज-अगुवानी ब्रिज प्रोजेक्ट में रिवर्क शुरू, सरकार ने संसाधन बढ़ाने के दिए निर्देश, रीडिजाइन और रिवर्क से जगी नई उम्मीद

बहुचर्चित सुलतानगंज अगुवानी गंगा ब्रिज अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। तकनीकी खामियों की गंभीर पहचान के बाद परियोजना प्रबंधन ने बड़ा फैसला लेते हुए पिलर संख्या 10, 11 और 12 के वेलकैप को काटकर पुनः निर्माण करने की रणनीति अपनाई है। ...

Sultanganj Aguwani bridge revamp begins govt boosts resource
सुल्तानगंज-अगुवानी ब्रिज प्रोजेक्ट में रिवर्क शुरू- फोटो : reporter

Bihar Aguwani Ganga Bridge: भागलपुर से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चा का केंद्र बना हुआ बहुचर्चित सुलतानगंज अगुवानी गंगा ब्रिज अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। तकनीकी खामियों की गंभीर पहचान के बाद परियोजना प्रबंधन ने बड़ा फैसला लेते हुए पिलर संख्या 10, 11 और 12 के वेलकैप को काटकर पुनः निर्माण करने की रणनीति अपनाई है। इसे सिर्फ तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि रीसेट मोड में चल रही मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर जंग माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक,परियोजना में सामने आई संरचनात्मक त्रुटियों ने इंजीनियरिंग टीम को फिर से ड्राइंग बोर्ड पर लौटने के लिए मजबूर कर दिया। अब नए डिजाइन के साथ काम को तेज करने की कोशिश की जा रही है। प्रोजेक्ट मैनेजर रविशंकर सिंह ने दावा किया है कि इस बार लक्ष्य स्पष्ट है जून के अंत तक कम से कम दो पिलर तैयार कर देना, ताकि परियोजना की रफ्तार को फिर से पटरी पर लाया जा सके।

इसी बीच, निर्माण स्थल पर केवल कंक्रीट और मशीनों का खेल नहीं चल रहा, बल्कि आस्था और विश्वास का भी संगम देखने को मिल रहा है। गंगा तट पर विशेष चंडी पाठ, रुद्राभिषेक और महाआरती जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। बनारस से आए सात पंडितों की टीम वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वातावरण को आध्यात्मिक रंग दे रही है। प्रबंधन का मानना है कि तकनीक के साथ आस्था का संतुलन ही इस जटिल परियोजना को सफल बना सकता है।

स्थानीय आचार्य विनोद कुमार तिवारी ने दावा किया है कि पिलर संख्या 5, 10 और 11 पर वास्तु दोष जैसी मान्यताओं के निवारण के लिए नवग्रह शांति और भगवान विश्वकर्मा की विशेष पूजा कराई जा रही है। गंगा पूजन और विघ्न-निवारण अनुष्ठानों को भी नियमित रूप से जारी रखा गया है।

हालांकि प्रशासनिक स्तर पर यह भी साफ किया गया है कि निर्माण की गति किसी भी हाल में नहीं रुकनी चाहिए। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सख्त निर्देश देते हुए संसाधन बढ़ाने, श्रमिकों की संख्या में वृद्धि और लंबित सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट जल्द जमा करने को कहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मई 2026 की समय-सीमा किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

सिमरिया ब्रिज के मुकाबले यहां बार-बार आ रही तकनीकी बाधाओं ने कई सवाल भी खड़े किए हैं। अब देखना यह होगा कि री-वर्क, री-डिजाइन और री-डेस्टिनी की यह त्रयी इस मेगा प्रोजेक्ट को समय पर पूरा कर पाती है या नहीं। फिलहाल गंगा के इस महत्वाकांक्षी पुल पर निगाहें टिकी हैं जहां इंजीनियरिंग और आस्था दोनों अपनी-अपनी कसौटी पर खड़े हैं।

रिपोर्ट- अंजनी कुमार कश्यप