Buxar News: आशियाने का सपना हुआ महंगा, नई सर्किल रेट ने बढ़ाया बोझ, रजिस्ट्री कार्यालय में कम हुई भीड़

Buxar News:बक्सर समेत पूरे इलाके में नई सर्किल रेट लागू होने के बाद जमीन कारोबार में हलचल तेज हो गई है।

Buxar News: आशियाने का सपना हुआ महंगा, नई सर्किल रेट ने बढ़ा
आशियाने का सपना हुआ महंगा- फोटो : SANDIP

Buxar : बिहार में नई सर्किल दरें लागू होते ही जमीन और मकान खरीदने वालों को बड़ा झटका लगा है। सरकार द्वारा न्यूनतम मूल्यांकन पंजी और स्टाम्प शुल्क में की गई बढ़ोतरी के बाद अब जमीन की रजिस्ट्री पहले से कहीं अधिक महंगी हो गई है। इसका सबसे ज्यादा असर उन मध्यम और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ने वाला है, जो वर्षों की जमा-पूंजी, बैंक लोन या परदेस में कमाने वाले परिजनों की मदद से अपने सपनों का आशियाना बनाने की तैयारी कर रहे थे।

बक्सर समेत पूरे इलाके में नई सर्किल रेट लागू होने के बाद जमीन कारोबार में हलचल तेज हो गई है। रजिस्ट्री कार्यालय में शुक्रवार को दिनभर लोगों के बीच इसी मुद्दे की चर्चा होती रही। लोग अपने भूखंडों की नई सरकारी कीमत और रजिस्ट्री पर आने वाले अतिरिक्त खर्च का हिसाब-किताब लगाने में जुटे रहे। बढ़ी हुई दरों का असर इतना स्पष्ट रहा कि दोपहर तक रजिस्ट्री प्रक्रिया लगभग ठप जैसी स्थिति में दिखाई दी।

नए नियमों के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनों की सरकारी मूल्यांकन दरों में 1.6 गुना तक वृद्धि की गई है, जबकि शहरी और पेरिफेरल इलाकों में यह बढ़ोतरी दो गुना तक पहुंच गई है। इसके साथ ही स्टाम्प शुल्क में भी इजाफा किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्टाम्प शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है। ऐसे में जमीन की खरीद के साथ-साथ रजिस्ट्री का खर्च भी काफी बढ़ गया है।

जमीन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि बाजार में पहले ही जमीन की कीमतें लगातार ऊपर जा रही थीं। अब सरकारी मूल्यांकन दर और स्टाम्प शुल्क बढ़ने से खरीदारों पर दोहरी मार पड़ रही है। जिन परिवारों ने जमीन खरीदने की योजना बना रखी थी, वे अब नए खर्चों के कारण असमंजस में पड़ गए हैं।

हालांकि रजिस्ट्री कार्यालय के अनुसार बढ़ी हुई दरों के बावजूद शुक्रवार को 52 रजिस्ट्रियां हुईं, लेकिन जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में रजिस्ट्री की संख्या में गिरावट देखी जा सकती है। कारण साफ है जितनी अधिक सरकारी कीमत और कर, उतना ज्यादा आर्थिक दबाव।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सरकारी राजस्व में वृद्धि जरूर होगी, लेकिन इसका सबसे बड़ा असर छोटे और मध्यम वर्ग के खरीदारों पर पड़ेगा। जिन लोगों के लिए एक छोटा सा प्लॉट खरीदना भी वर्षों की मेहनत और बचत का नतीजा होता है, उनके लिए अब अपने घर का सपना पूरा करना पहले से अधिक मुश्किल और महंगा साबित हो सकता है।नई सर्किल दरों ने जमीन बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। जहां सरकार इसे राजस्व और मूल्यांकन व्यवस्था को वास्तविक बाजार दरों के करीब लाने का कदम बता रही है, वहीं आम लोगों के लिए यह फैसला उनके सपनों के आशियाने की कीमत और बढ़ाने वाला साबित हो रहा है।

संदीप की रिपोर्ट