नवरात्र के मौके पर मुरारी स्वामी ने की दंडवत परिक्रमा, राधे-कृष्ण मंदिर से मां दुर्गा के दरबार तक लगाई अर्जी

छपरा जिले में नवरात्र के मौके पर परम पूज्य गुरुदेव श्रीधर बाबा के शिष्य मुरारी स्वामी ने दंडवत परिक्रमा करते हुए राधे-कृष्ण मंदिर से मां दुर्गा के दरबार पहुंचे। जहां उन्होने विश्व कल्याण और हर घर में सुख-समृद्धि की प्रार्थना की.....

नवरात्र के मौके पर मुरारी स्वामी ने की दंडवत परिक्रमा, राधे-
नवरात्र पर दंडवत परिक्रमा- फोटो : धर्मेंन्द्र रस्तोगी

Chapra : जिले में शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर आस्था और सामाजिक सद्भाव का एक बेहद प्रेरणादायक और अनूठा दृश्य देखने को मिला है। परम पूज्य गुरुदेव श्रीधर बाबा के शिष्य मुरारी स्वामी ने रविवार को नवरात्र के खास मौके पर दंडवत परिक्रमा कर समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का जोरदार संदेश दिया। उन्होंने राधे-कृष्ण मंदिर से अपनी दंडवत परिक्रमा शुरू की और कठिन साधना करते हुए शहर के मां दुर्गा के भव्य पूजा पंडाल तक पहुंचे, जहां उन्होंने भगवती के चरणों में अपना शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।


विश्व कल्याण और हर घर में सुख-समृद्धि की प्रार्थना

परिक्रमा के दौरान मुरारी स्वामी ने देश, समाज और संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए विशेष कामना की। उन्होंने मां दुर्गा से प्रार्थना की कि देश का प्रत्येक नागरिक स्वस्थ, सुखी, शिक्षित और आत्मनिर्भर बने। उनकी मुख्य कामना यह रही कि समाज से ईर्ष्या, द्वेष और घृणा की भावना हमेशा के लिए समाप्त हो जाए और हर घर में प्रेम तथा शांति का वातावरण कायम रहे। उन्होंने अपील की कि लोग जाति, धर्म और ऊंच-नीच के भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे के सुख-दुख में साझीदार बनें और मानवता की सेवा को अपने जीवन की प्राथमिकता बनाएं।


सामाजिक समरसता और समानता का संदेश

मुरारी स्वामी की इस धार्मिक और आध्यात्मिक यात्रा का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए समाज में एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया गया। उन्होंने कामना की कि समाज में बढ़ती दूरियां और आपसी नफरत खत्म हों तथा सहयोग, सम्मान और संवेदनशीलता की भावना मजबूत हो। उनकी प्रार्थना में यह भाव प्रमुख रहा कि देश में कोई भी परिवार भूखा न सोए, गरीबों व जरूरतमंदों को उचित सहारा मिले, बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के पर्याप्त अवसर मिल सकें ताकि समाज का कोई भी वर्ग उपेक्षित महसूस न करे।


सेवा और करुणा से ही सार्थक होगी सच्ची आराधना

इस पूरी यात्रा के माध्यम से यही संदेश दिया गया कि सच्ची पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ जीवन में दया, करुणा, क्षमा और परोपकार के भाव विकसित होना बेहद जरूरी है। परिवारों में आपसी प्रेम, समाज में एकता और व्यवहार में परस्पर सम्मान ही सच्ची शांति का आधार स्तंभ हैं। नवरात्र के इस पवित्र दिनों में मुरारी स्वामी की दंडवत परिक्रमा ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की महान भारतीय संस्कृति को एक बार फिर जीवंत कर दिया है।


धर्मेंद्र की रिपोर्ट