एशियन गेम्स में चमका सारण का लाल: कोच हरेश कुमार के मार्गदर्शन में भारतीय तीरंदाजों ने जीता स्वर्ण, भारत को मिला ओलंपिक कोटा
सारण जिले के मशरक प्रखंड स्थित कोडराव गांव निवासी और भारतीय तीरंदाजी टीम के वरिष्ठ कोच हरेश कुमार के कुशल मार्गदर्शन में भारतीय खिलाड़ियों ने 20वें एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया है......
Chapra : जापान के आइची-नागोया में आयोजित 20वें एशियन गेम्स में भारतीय तीरंदाजी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया है। सारण जिले के मशरक प्रखंड स्थित कोडराव गांव निवासी और भारतीय तीरंदाजी टीम के वरिष्ठ कोच हरेश कुमार के कुशल मार्गदर्शन में भारतीय खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। इस जीत के साथ ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी श्रेष्ठता साबित की है।
चिकिथा और साहिल की जोड़ी ने कंपाउंड मिक्स्ड टीम में जीता गोल्ड, मिला LA 2028 ओलंपिक कोटा
कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा के रोमांचक फाइनल में चिकिथा तनिपार्थी और साहिल राजेश जाधव की जोड़ी ने दक्षिण कोरिया की मजबूत टीम (पार्क जोंगयून और चोई योंगही) को पराजित किया। 157-157 की बराबरी के बाद हुए शूटआउट में भारतीय जोड़ी ने 20-19 से ऐतिहासिक जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस स्वर्णिम सफलता के साथ ही भारत ने 'लॉस एंजिल्स 2028' ओलंपिक के लिए अपना पहला कोटा भी पक्का कर लिया है।
सारण के कोडराव गांव से अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी कोच बनने तक का सफर
सारण जिले के एक छोटे से ग्रामीण परिवेश कोडराव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के मुख्य प्रशिक्षक बनने तक का हरेश कुमार का सफर बेहद प्रेरणादायक है। पूर्व में पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन (SAI) में कोचिंग देने के बाद वर्तमान में वे कोलकाता के साल्ट लेक स्थित 'खेलो इंडिया' में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज अंजली कुमारी और साहिल जाधव जैसे प्रतिभावान खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर देश का तिरंगा लहराया है।
साहिल जाधव की दोहरी सफलता और भारतीय कंपाउंड टीम का दबदबा
कोच हरेश कुमार के शिष्य साहिल राजेश जाधव ने इस प्रतियोगिता में दोहरी सफलता हासिल की। उन्होंने पुरुष कंपाउंड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने के बाद चिकिथा के साथ मिक्स्ड टीम में भी गोल्ड मेडल जीता। इस एशियन गेम्स में भारतीय कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने महिला, पुरुष और मिक्स्ड—तीनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
ग्रामीण बिहार से अंतरराष्ट्रीय मंच तक मिली नई पहचान, बिहार में खुशी की लहर
बिहार की मिट्टी से निकले कोच हरेश कुमार की इस अभूतपूर्व उपलब्धि से पूरे सारण जिले और बिहार के खेल जगत में जश्न का माहौल है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आकर देश के खिलाड़ियों को तराशने और उन्हें ओलंपिक कोटा दिलाने तक का उनका यह सफर बिहार की युवा खेल प्रतिभाओं के लिए एक बहुत बड़ा प्रेरणास्रोत बन गया है।
धर्मेन्द्र की रिपोर्ट