थानाध्यक्ष पर गिरी गाज: महिला डॉक्टर को बीच सड़क पर दी थी गंदी गालियां, 24 घंटे में हुए सस्पेंड!

दरभंगा में एक महिला चिकित्सक और उनके चालक के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले बेंता थानाध्यक्ष पर पुलिस कप्तान का डंडा चला है। पुलिस की छवि धूमिल करने के आरोप में थानाध्यक्ष को 24 घंटे के भीतर सस्पेंड कर दिया गया है।

थानाध्यक्ष पर गिरी गाज: महिला डॉक्टर को बीच सड़क पर दी थी गं

Darbhanga - दरभंगा के बेंता थानाध्यक्ष हरेंद्र कुमार को एक महिला चिकित्सक और उनके चालक के साथ सरेआम गाली-गलौज करने के आरोप में एसएसपी ने पद से निलंबित कर दिया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यह त्वरित कार्रवाई की गई है। 

24 घंटे के भीतर निलंबन की कार्रवाई

एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी ने बेंता थानाध्यक्ष हरेंद्र कुमार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें 24 घंटे के अंदर निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई थानाध्यक्ष द्वारा एक महिला चिकित्सक और उनके चालक को अश्लील गालियां देने और अभद्र व्यवहार करने के मामले में की गई है। 

सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ था वायरल

थानेदार की बदजुबानी का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ था। वीडियो में हरेंद्र कुमार बीच सड़क पर डॉक्टर और उनके चालक के साथ अत्यंत अभद्र भाषा का प्रयोग करते दिखे थे। मंगलवार की रात वीडियो संज्ञान में आते ही एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए थे। 

एसडीपीओ की जांच में दोषी पाए गए थानेदार

एसएसपी ने सदर एसडीपीओ राजीव कुमार को इस पूरे प्रकरण की जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। जांच रिपोर्ट में थानाध्यक्ष को न केवल इस घटना के लिए दोषी पाया गया, बल्कि यह भी सामने आया कि पूर्व में भी उनके खिलाफ इस तरह की कई शिकायतें मिल चुकी थीं। रिपोर्ट मिलते ही बुधवार शाम को निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया। 

"पुलिस की छवि खराब करना बर्दाश्त नहीं"

एसएसपी ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि बार-बार आम नागरिकों के साथ संयमित और संतुलित भाषा का प्रयोग करने का निर्देश दिया जाता है। इसके बावजूद बीच सड़क पर किया गया ऐसा व्यवहार पुलिस विभाग की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। आदेशों का उल्लंघन और अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।

पुलिस महकमे में मचा हड़कंप

एक दबंग थानेदार पर एसएसपी की इस बिजली जैसी फुर्तीली कार्रवाई से जिले के अन्य पुलिसकर्मियों में भी हड़कंप मच गया है। इस फैसले की आम जनता और चिकित्सा जगत में सराहना हो रही है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम नागरिकों के सम्मान और पुलिस की जवाबदेही से जुड़ा मामला है।