Darbhanga Maharani passes away: मिथिला में मातम, दरभंगा राजघराने की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का 96 वर्ष की उम्र में निधन, मुखाग्नि देंगे बड़े पौते कुमार रत्नेश्वर सिंह

Darbhanga Maharani passes away: दरभंगा राजघराने के इतिहास का एक युग आज अंत हो गया है।...

Mourning in Mithila Last Darbhanga Maharani Kamsundari Devi
मिथिला में मातम- फोटो : reporter

Darbhanga Maharani passes away: दरभंगा राजघराने के इतिहास का एक युग आज अंत हो गया  है। दरभंगा के अंतिम महाराजा कामेश्वर सिंह की धर्मपत्नी, महारानी कामसुंदरी देवी का सोमवार को 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार रहने के कारण महारानी बिस्तर पर ही थीं और अपने राज परिसर स्थित कल्याणी निवास में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

परिवार ने बताया कि महारानी का अंतिम संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार किया जाएगा। मुख्य अग्नि उनके बड़े पौते, कुमार रत्नेश्वर सिंह द्वारा दी जाएगी। वर्तमान में पार्थिव शरीर मिथिलांचल के लोगों के लिए अंतिम दर्शन हेतु उनके आवास पर रखा गया है। अंतिम यात्रा की तैयारी परिवार के लोगों के आने के बाद माधेश्वर परिसर, श्यामा माई कैंपस में पूरी की जाएगी।

महारानी कामसुंदरी देवी दरभंगा के अंतिम महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी और अंतिम पत्नी थीं। उनका विवाह 1940 के दशक में हुआ था। महाराजा की पहली दो पत्नियां, महारानी राजलक्ष्मी और महारानी कामेश्वरी प्रिया, पहले ही संसार से विदा हो चुकी थीं। ऐसे में कामसुंदरी देवी राजपरिवार की वरिष्ठ सदस्य और परिवार की मरकज़ी शख्सियत थीं।

सिर्फ़ राजसी ठाठ ही नहीं, महारानी कामसुंदरी देवी अपने सामाजिक और परोपकारी कामों के लिए भी जानी जाती थीं। उन्होंने अपने पति की स्मृति में “महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन” की स्थापना की। इस फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण काम किए गए। उनकी देखरेख में फाउंडेशन ने मिथिला में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्थायी योगदान दिया।

महारानी कामसुंदरी देवी का निधन न सिर्फ़ राजपरिवार के लिए, बल्कि पूरे मिथिला समाज के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके योगदान और सेवा की यादें आने वाले कई वर्षों तक लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।

रिपोर्ट- वरुण कुमार ठाकुर