Bihar News: गणतंत्र दिवस की आड़ में नियमों का कत्ल, दरभंगा में मटन-मछली की खुली मंडी, कटघरे में निगम प्रशासन

Bihar News: सरकारी फरमान के बावजूद मटन और मछली की खुलेआम बिक्री ने क़ानून-व्यवस्था की पोल खोल दी।....

Republic Day Violations Meat Fish Sold Openly in Darbhanga
गणतंत्र दिवस की आड़ में नियमों का कत्ल- फोटो : reporter

Darbhanga: जिले की फिज़ाओं में 77वें गणतंत्र दिवस का जश्न होना था, तिरंगे की शान और क़ानून की सलामी दिखनी थी, लेकिन शहर की गलियों–चौराहों पर एक अलग ही तमाशा चलता रहा। सरकारी फ़रमान के बावजूद मटन और मछली की खुलेआम बिक्री ने क़ानून-व्यवस्था की पोल खोल दी। नगर निगम और ज़िला प्रशासन की नाक के नीचे नियमों की ऐसी धज्जियाँ उड़ीं कि सवाल अब सीधे हुक़ूमत की निगरानी पर उठ रहे हैं।

नगर निगम ने पहले ही एलान कर दिया था कि 26 जनवरी को मटन-मछली की बिक्री पर पूर्ण पाबंदी रहेगी। पोस्टर, मुनादी और अपील सब हुआ। मगर ज़मीन पर हुक्मनामा बेअसर साबित हुआ। चौक–चौराहों से लेकर मोहल्लों तक, कसाईखानों के शटर आधे गिरे रहे और तराज़ू पूरी रफ़्तार में। सबसे ताज़ा मामला लहेरियासराय थाना क्षेत्र के सेदनगर स्थित अभंडा भठियारिसराय का है, जहाँ गणतंत्र दिवस के दिन खुलेआम मटन बिकता दिखा बिना किसी डर, बिना किसी रोक-टोक।

मीट विक्रेता मोहम्मद अब्बास का बयान इस कहानी में और स्याही घोल देता है। उसने कहा, “शहर में मछली खुलेआम बिक रही है, हम तो पर्दे में काम कर रहे हैं। अगर मछली पर सख़्ती हो जाए, तो आज मटन नहीं बेचेंगे।” यह बयान महज़ एक दलील नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढिलाई का कबूलनामा है जहाँ एक अवैध को दूसरे अवैध की ढाल बनाया जा रहा है।

सबसे संगीन सवाल यह है कि इतने प्रचार-प्रसार के बावजूद निगरानी तंत्र को भनक तक क्यों नहीं लगी? क्या पेट्रोलिंग काग़ज़ों तक सीमित रही? क्या आदेश महज़ फाइलों की शोभा बनकर रह गए? गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर क़ानून का यह मज़ाक सामाजिक अनुशासन पर सीधा हमला है।

मामले पर दरभंगा नगर आयुक्त ने जांच और सख़्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। कहा गया है कि प्रतिबंध तोड़ने वालों पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा। मगर शहर पूछ रहा है क्या यह कार्रवाई भी बयानबाज़ी तक सिमटेगी, या सच में कसाईखानों पर ताले पड़ेंगे?

क़ानून की किताब साफ़ है, मगर अमल की ज़मीन फिसलन भरी। अब देखना यह है कि दरभंगा में गणतंत्र की गरिमा बहाल होती है या नियमों का क़त्ल यूँ ही जारी रहता है।

रिपोर्ट- वरुण कुमार ठाकुर