Gaya elderly couple death: गया में सात फेरों का साथ निभाकर एक साथ ब्रह्मलीन हुआ बुजुर्ग दंपती, गांव में भावुक माहौल

Gaya elderly couple death: गया जिले के टिकारी प्रखंड के सिंघापुर गांव में 101 वर्षीय पति और 100 वर्षीय पत्नी का एक साथ निधन हो गया। ये प्रेम और साथ की भावुक मिसाल बन गया।

Gaya elderly couple death
ब्रह्मलीन हुए बुजुर्ग दंपती- फोटो : social media

Gaya elderly couple death: बिहार के गया जिले के टिकारी प्रखंड अंतर्गत सिंघापुर गांव से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। यहां 101 वर्षीय बासदेव ठाकुर और उनकी 100 वर्षीय पत्नी सुभागी देवी ने एक साथ इस संसार को अलविदा कह दिया। जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने वाले इस बुजुर्ग दंपती का यूं एक साथ निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव के लिए गहरे भावनात्मक क्षण बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा लगता है जैसे दोनों ने साथ जीने के साथ-साथ साथ मरने की भी मन्नत पूरी कर ली हो। इस घटना को लोग सच्चे प्रेम और अटूट रिश्ते की मिसाल के रूप में देख रहे हैं।

रात में साथ किया भोजन, सुबह मिली दुखद खबर

दंपती के पुत्र महेश कुमार ठाकुर ने बताया कि सोमवार की रात दोनों ने हमेशा की तरह साथ में भोजन किया और इसके बाद अपने कमरे में सोने चले गए। मंगलवार की सुबह जब घर के लोग उन्हें जगाने पहुंचे, तो देखा कि दोनों अपने-अपने बिस्तर पर शांत अवस्था में मृत पड़े थे। यह दृश्य देखकर घर में कोहराम मच गया। एक साथ माता-पिता के निधन से परिजन गहरे सदमे में हैं। किसी को समझ नहीं आ रहा कि इस दुख को कैसे सहन किया जाए। गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई और लोग अंतिम दर्शन के लिए उनके घर पहुंचने लगे।

सादगी और अनुशासन की मिसाल थे बासदेव ठाकुर

बासदेव ठाकुर कोलकाता पुलिस अस्पताल से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। ग्रामीणों के अनुसार वे बेहद सरल, अनुशासित और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। जीवनभर उन्होंने ईमानदारी और सादगी से जीवन व्यतीत किया। वहीं उनकी पत्नी सुभागी देवी धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं। पूजा-पाठ और सेवा में उनका विशेष विश्वास था। गांव में उन्हें एक शांत, स्नेही और संस्कारी महिला के रूप में जाना जाता था।

प्रेम, सम्मान और आस्था की मिसाल बना दंपती

गांव के लोगों का कहना है कि दोनों के बीच अटूट प्रेम और आपसी सम्मान देखने को मिलता था। उम्र के इस पड़ाव पर भी वे एक-दूसरे का पूरा ख्याल रखते थे। दंपती ने गांव में शिव मंदिर का निर्माण भी कराया था, जो उनकी गहरी धार्मिक आस्था और समाज के प्रति योगदान का प्रतीक है। उनकी जीवन यात्रा गांव के युवाओं और परिवारों के लिए प्रेरणा मानी जाती है।

एक साथ अंतिम यात्रा, विष्णुपद में हुआ संस्कार

दंपती के एक साथ निधन की खबर मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उनके घर पहुंचे। हर कोई इस प्रेममयी विदाई को देखकर भावुक हो उठा। बासदेव ठाकुर के तीन पुत्र और एक पुत्री हैं, हालांकि एक पुत्र का निधन पहले ही हो चुका है। स्वजनों ने दोनों का अंतिम संस्कार एक साथ गया के विष्णुपद स्थित श्मशान घाट पर किया। पति-पत्नी की चिता एक साथ जलती देख हर आंख नम हो गई।