Bihar News : शराबबंदी पर 50-50 ! एनडीए के चार दलों में से दो ने की शराबबंदी की समीक्षा करने की मांग, रालोमो की मांग का ‘हम’ ने किया समर्थन
GAYAJI : बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर सत्ताधारी एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर से ही विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। गया में मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने रालोमो विधायक माधव आनंद बयान का समर्थन किया है। मांझी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है जब मुख्यमंत्री को इस कानून की जमीनी हकीकत को समझते हुए इसकी गंभीर समीक्षा करनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री का यह बयान राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के विधायक माधव आनंद द्वारा विधानसभा में शराबबंदी की समीक्षा की मांग उठाए जाने के बाद आया है। मांझी ने माधव आनंद की बात का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य सरकार को इस नीति के कारण भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है, जिस पर विचार करना अनिवार्य है।
शराबबंदी की विफलता पर प्रहार करते हुए मांझी ने कहा, "बिहार में शराबबंदी तो प्रभावी ढंग से लागू हो नहीं पा रही है, बल्कि अब तो इसकी 'होम डिलीवरी' हो रही है। बाहर के राज्यों से महंगी शराब बिहार आ रही है, जिससे जनता का पैसा प्रदेश से बाहर जा रहा है।" उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रशासन बड़े तस्करों को पकड़ने के बजाय गरीबों को प्रताड़ित कर रहा है, जबकि शराब माफिया खुलेआम अपना सिंडिकेट चला रहे हैं।
जीतन राम मांझी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए पहले भी कहा है कि शराबबंदी कानून के तहत दर्ज लाखों मुकदमों में अधिकांश गरीब और दलित समाज के लोग जेलों में बंद हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को नसीहत दी कि अगर राजस्व की हानि हो रही है और कानून केवल कागजों पर सीमित है, तो ऐसी नीति पर अड़े रहने का कोई लाभ नहीं है।
इस बयान के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां नीतीश कुमार शराबबंदी को अपनी सबसे बड़ी सामाजिक उपलब्धि मानते हैं, वहीं उनके अपने सहयोगी दल अब इसे 'आर्थिक बोझ' और 'भ्रष्टाचार का जरिया' बताने लगे हैं। अब देखना यह है कि सहयोगी दलों के इस बढ़ते दबाव पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्या रुख अपनाते हैं।
मनोज की रिपोर्ट