गया में कुएं ने निगली 4 जिंदगियां, जहरीली गैस से पिता-पुत्र समेत चार की मौत, आश्रितों को 16 लाख मुआवजा

कुएं के अंदर जहरीली गैस की चपेट में आने से चार व्यक्तियों की मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हुआ और SDRF तथा अग्निशमन विभाग की टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर सभी शवों को कुएं से बाहर निकाला।...

गया में कुएं ने निगली 4 जिंदगियां, जहरीली गैस से पिता-पुत्र
कुएं ने निगली 4 जिंदगियां- फोटो : reporter

Bihar Accident: गया जिले के शेरघाटी अनुमंडल अंतर्गत डोभी प्रखंड में सोमवार को एक दर्दनाक हादसे ने चार परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। कुएं के अंदर जहरीली गैस की चपेट में आने से चार व्यक्तियों की मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हुआ और SDRF तथा अग्निशमन विभाग की टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर सभी शवों को कुएं से बाहर निकाला।

यह घटना उस खतरे की भयावह तस्वीर है, जिसे अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं। बंद और संकरे स्थानों, खासकर पुराने कुएं, टैंक या अन्य गड्ढों में जहरीली गैस जमा हो सकती है, जिसका पता ऊपर से आसानी से नहीं चलता। कुछ ही क्षणों में ऐसी गैस इंसान की जान ले सकती है।डोभी में हुई घटना में चार लोगों की जान चली गई। मृतकों की पहचान विजय चौधरी (लगभग 55 वर्ष), चामारी मांझी (लगभग 57 वर्ष), विकास कुमार (लगभग 23 वर्ष) और दिलचन्द कुमार (लगभग 26 वर्ष) के रूप में हुई है। सभी डोभी प्रखंड, शेरघाटी अनुमंडल, गया जिले के निवासी बताए गए हैं।मृतकों में विजय चौधरी और विकास कुमार पिता-पुत्र बताए गए हैं। एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है।

घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन के निर्देश पर SDRF और अग्निशमन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची। कुएं के अंदर जहरीली गैस की आशंका के बीच बचाव अभियान बेहद जोखिम भरा था।प्रशिक्षित बचाव दल ने सुरक्षा उपायों के साथ अभियान चलाया और चारों मृतकों के शवों को बाहर निकाला। इसके बाद आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की गई।

हादसे के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर आपदा विभाग की ओर से मृतकों के निकटतम आश्रितों को प्रति मृतक ₹4 लाख की अनुग्रह सहायता राशि दी गई। चार मृतकों के परिवारों को कुल ₹16 लाख की सहायता राशि का चेक उपलब्ध कराया गया।

जिला प्रशासन की ओर से बताया गया है कि घटना के बाद आवश्यक राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। संबंधित परिवारों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय किया जा रहा है।अपर समाहर्ता आपदा पंकज कुमार ने आम लोगों से बेहद महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और विशेषज्ञों की सहायता के कुएं, टैंक या किसी अन्य बंद एवं संकरे स्थान में प्रवेश नहीं करना चाहिए।

ऐसे स्थानों में ऑक्सीजन की कमी के साथ-साथ जहरीली गैसों की मौजूदगी भी हो सकती है। ऊपर से सामान्य दिखाई देने वाला कुआं अंदर से जानलेवा गैस का जाल हो सकता है। एक व्यक्ति के बेहोश होने के बाद उसे बचाने के लिए बिना सुरक्षा उपकरण अंदर उतरने वाला दूसरा व्यक्ति भी हादसे का शिकार हो सकता है।गया की यह घटना सिर्फ चार परिवारों के लिए त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। ग्रामीण इलाकों में कुएं, सेप्टिक टैंक, गड्ढे और बंद स्थानों में उतरने से पहले गैस की जांच, ऑक्सीजन स्तर की पुष्टि और प्रशिक्षित बचाव दल की मदद बेहद जरूरी है।फिलहाल जिला प्रशासन ने राहत कार्य को प्राथमिकता दी है और मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। लेकिन इन चार मौतों ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि जानलेवा गैस से भरे बंद स्थानों को लेकर ग्रामीण स्तर पर सुरक्षा जागरूकता और तत्काल बचाव व्यवस्था कितनी मजबूत है।

रिपोर्ट- मनोज कुमार