Gaya News: नक्सली इलाकों में प्रशासन की बड़ी कामयाबी, आजादी के बाद पहली बार हुआ ये काम -

जानें कैसे गया जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पहली बार शाम 6 बजे तक शांतिपूर्ण मतदान हुआ। यह बदलाव लोकतंत्र में नई उम्मीद जगाता है।

Gaya News: नक्सली इलाकों में प्रशासन की बड़ी कामयाबी, आजादी क
इमामगंज विधानसभा का चुनाव इतिहास में दर्ज- फोटो : freepik

Gaya News: गया जिले के इमामगंज विधानसभा क्षेत्र में इस बार का चुनाव इतिहास में दर्ज हो गया है। स्वतंत्रता के बाद पहली बार इन इलाकों में शाम 6 बजे तक शांतिपूर्ण मतदान हुआ। प्रशासन के इस कदम से न केवल लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हुई हैं, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास का माहौल भी बना है।

क्यों ऐतिहासिक है यह मतदान?

पहले नक्सलियों का खौफ

गया जिले के इमामगंज क्षेत्र का चुनावी इतिहास खतरनाक रहा है।

पूर्व की घटनाएं:

2005 के चुनाव में नक्सलियों ने सुलगाही पहाड़ी के पास तत्कालीन डीएम और एसपी की गाड़ी उड़ाने की कोशिश की थी।

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हत्याओं की घटनाएं:

मैगरा बाजार के पास पूर्व सांसद राजेश कुमार और चार अन्य की हत्या, नक्सली खतरों का बड़ा उदाहरण है।

प्रशासन का नया कदम

पहले चुनाव केवल दिन के उजाले में दोपहर 3 या 4 बजे तक ही होते थे। लेकिन इस बार 29 बूथों पर शाम 6 बजे तक मतदान कराया गया। इससे लोगों को अधिक समय और सुरक्षा के बीच मतदान का अवसर मिला।

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2023 चुनाव: बदलते माहौल की झलक

नक्सल प्रभाव कम होने का संकेत

प्रशासन के मुताबिक, बदलते माहौल के चलते यह संभव हो पाया है।

शांतिपूर्ण मतदान:

पहली बार किसी नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बिना किसी हिंसा के मतदान प्रक्रिया संपन्न हुई।

जनता की भागीदारी:

अधिक समय तक मतदान की सुविधा से लोगों ने बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का उपयोग किया।

शाम 6 बजे तक मतदान के बूथ

यह मतदान 29 बूथों पर हुआ, जिनमें प्रमुख हैं:

प्राथमिक विद्यालय चांदपुर

सामुदायिक विकास भवन जलालपुर

उत्क्रमित मध्य विद्यालय बालासोत

मध्य विद्यालय डुमरिया

इन बूथों पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोटिंग हुई, जो एक नई शुरुआत का संकेत है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोकतंत्र की जीत

सुरक्षा व्यवस्था में सुधार

प्रशासन ने मतदान कर्मियों और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए।

चुनाव समाप्त होने के बाद भी कर्मियों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था की गई।

उम्मीद की किरण

2025 के विधानसभा चुनाव में और अधिक बूथों पर शाम 6 बजे तक मतदान कराने की योजना है। यह बदलाव लोकतंत्र को मजबूत करने और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जीवन बहाल करने का एक बड़ा कदम है।