Bihar News:अस्पताल में अव्यवस्था का पर्दाफाश, सिविल सर्जन के छापे से मचा हड़कंप, अस्पताल की बदहाल तस्वीर देखकर भड़के अफसर

Bihar News: बिहार सरकार चाहे लाख दावे कर ले कि सरकारी अस्पतालों की सेहत सुधर चुकी है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है।

Kaimur Hospital Mismanagement
सिविल सर्जन के छापे से मचा हड़कंप- फोटो : reporter

Bihar News: बिहार सरकार चाहे लाख दावे कर ले कि सरकारी अस्पतालों की सेहत सुधर चुकी है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। ताजा मामला कैमूर जिले के मोहनियां अनुमंडल अस्पताल का है, जहां अचानक निरीक्षण के लिए पहुंचे सिविल सर्जन ने अस्पताल की बदहाल तस्वीर देख तेवर सख्त कर लिए।

निरीक्षण के दौरान जैसे ही सिविल सर्जन अस्पताल परिसर में दाखिल हुए, अस्पताल कर्मियों में हड़कंप मच गया। वार्ड से लेकर परिसर तक फैली गंदगी, अव्यवस्थित रिकॉर्ड और कर्मचारियों की लापरवाही देखकर सिविल सर्जन का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर ही अस्पताल प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई और साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर जल्द व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई तो सख्त कार्रवाई तय है।

अस्पताल में साफ-सफाई की हालत इतनी बदतर पाई गई कि मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। यह कोई पहली बार नहीं है जब मोहनियां अनुमंडल अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हों। इससे पहले जिला अधिकारी ने भी अस्पताल का निरीक्षण किया था और कई जरूरी निर्देश दिए थे, लेकिन अफसोस की बात यह है कि उन आदेशों पर अमल नहीं हुआ।मोहनियां से होकर राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है, जहां रोजाना सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। ऐसे में गंभीर घायलों को इसी अस्पताल में लाया जाता है। इसके अलावा सैकड़ों मरीज रोज इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं। बावजूद इसके अस्पताल की अव्यवस्था यह सोचने पर मजबूर करती है कि मरीजों की जान के साथ कहीं खिलवाड़ तो नहीं हो रहा।

कैमूर की सिविल सर्जन डॉ. राजेश्वरी रजक ने कहा कि समय-समय पर सभी सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण किया जाता है। मोहनियां अनुमंडल अस्पताल में निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई और व्यवस्था से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जल्द सुधार करें, अन्यथा विभागीय कार्रवाई से नहीं बख्शा जाएगा।

फिलहाल, इस निरीक्षण के बाद अस्पताल प्रशासन में खलबली मची हुई है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सख्ती महज चेतावनी बनकर रह जाएगी या सच में व्यवस्था सुधरेगी।

रिपोर्ट- देवव्रत तिवारी