Bihar News:आजादी के 79 साल बाद भी विकास की राह देख रहा चक्की पार, नाव के भरोसे 5 हजार लोगों की ज़िंदगी, सड़क-पुल आज भी सपना
Bihar News: आजादी के 79 वर्ष बीत जाने के बावजूद खगड़िया जिले के गगौर पंचायत स्थित चक्की पार गांव विकास की मुख्यधारा से अब भी कटा हुआ है।...
Khagaria: आजादी के 79 वर्ष बीत जाने के बावजूद खगड़िया जिले के गगौर पंचायत स्थित चक्की पार गांव विकास की मुख्यधारा से अब भी कटा हुआ है। करीब 5 हजार की आबादी वाला यह गांव आज भी सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। गांव तक पहुंचने का एकमात्र साधन गंडक नदी पर चलने वाली नाव है। यही नाव यहां के लोगों की जीवनरेखा भी है और मजबूरी भी। हर दिन हजारों ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को विवश हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल, बाजार, अस्पताल या किसी भी जरूरी काम के लिए गंडक नदी नाव से पार करनी पड़ती है। सड़क और पुल नहीं होने के कारण मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। हाल ही में सांप काटने से एक व्यक्ति की मौत इसलिए हो गई क्योंकि समय पर उसे अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। कई बार लोगों को घंटों तक नाव का इंतजार करना पड़ता है, जिससे आपातकालीन स्थिति में जीवन बचाना भी मुश्किल हो जाता है।
शिक्षा व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक है। गांव में केवल एक उत्क्रमित मध्य विद्यालय है, जहां कक्षा 1 से 8 तक लगभग 490 बच्चों की पढ़ाई मात्र चार शिक्षकों के भरोसे चल रही है। दो कमरों में तीन-तीन कक्षाएं और एक कमरे में दो कक्षाएं संचालित की जाती हैं। उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को रोज नदी पार करनी पड़ती है। नाव की अनियमित व्यवस्था और संसाधनों के अभाव में कई छात्र पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
पीने के पानी की समस्या भी गांववासियों की मुश्किलें बढ़ा रही है। जल-नल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है। कभी कुछ मिनट पानी आता है तो कई दिनों तक सप्लाई बंद रहती है, जिससे महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है।करीब 1200 मतदाताओं वाले इस गांव के लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव को भुला दिया जाता है। सड़क, पुल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं आज भी केवल वादों तक सीमित हैं।
स्थानीय युवा निरंजन कुमार ने बताया कि गांव में न खेल का मैदान है, न हाई स्कूल और न ही स्वास्थ्य केंद्र। डिफेंस की तैयारी के लिए उन्हें रोज नदी पार करनी पड़ती है, जिसमें दो से तीन घंटे का समय लग जाता है। प्रतिमा देवी ने नाव के इंतजार की पीड़ा बयां की, जबकि दूध व्यवसायी मुकेश यादव ने कहा कि नाव में देरी के कारण कई बार उनका दूध खराब हो जाता है। उनका कहना है कि यदि गंडक नदी पर पुल बन जाए तो 40 किलोमीटर का सफर घटकर मात्र 2 किलोमीटर रह जाएगा। वहीं कुमकुम देवी, फुलेन यादव और मिंटू राय ने बताया कि बरसात के दिनों में नाव से सफर करना किसी खतरे से कम नहीं होता और रोजगार व शिक्षा के अभाव में गांव के अधिकांश युवाओं को पलायन करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने सरकार से गंडक नदी पर शीघ्र पुल निर्माण और गांव तक पक्की सड़क बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यह सपना पूरा हो जाए तो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। फिलहाल, चक्की पार गांव के लोग आज भी नाव के सहारे जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं और विकास की आस में सरकार की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं।
रिपोर्ट- अमित कुमार