Bihar news: लोगों ने परंपरा तोड़ कर मृत्यु भोज छोड़कर एंबुलेंस और कलम का रास्ता चुना , दिवंगत को सच्ची श्रद्धांजलि के लिए ग्रामीणों का अनोखा फैसला
Bihar news:गांव में हुई बैठक में ग्रामीणों और आमजनों ने सर्वसम्मति से मृत्यु भोज नहीं करने और उसकी जगह गांव के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।...
Bihar news: खगड़िया के बेलदौर प्रखंड स्थित पनसलवा गांव में सामाजिक बदलाव की एक मिसाल पेश करने वाली पहल सामने आई है। स्वर्गीय परमेश्वरी सिंह उर्फ पमसी बाबू की स्मृति में ग्रामीणों ने मृत्यु भोज की पारंपरिक रस्म के बजाय जनसेवा को तरजीह देने का फैसला किया है। मंगलवार सुबह विधायक एवं राजकीय आश्वासन समिति के सभापति पन्नालाल सिंह पटेल के दरवाजे पर हुई बैठक में ग्रामीणों और आमजनों ने सर्वसम्मति से मृत्यु भोज नहीं करने और उसकी जगह गांव के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।
बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि मृत्यु भोज में बड़ी रकम एक दिन के आयोजन पर खर्च हो जाती है। इसके बजाय अगर यही धनराशि स्वास्थ्य और जरूरतमंदों की मदद में लगाई जाए तो इसका फायदा लंबे समय तक समाज को मिल सकता है। इसी सोच के तहत गांव में एंबुलेंस उपलब्ध कराने पर सहमति बनी।ग्रामीणों के मुताबिक प्रस्तावित एंबुलेंस का इस्तेमाल आपात स्थिति में गरीब, असहाय और जरूरतमंद मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए किया जाएगा। खासकर रात या अचानक तबीयत बिगड़ने की स्थिति में यह सुविधा ग्रामीणों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
बैठक में बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने को लेकर भी चर्चा हुई। ग्रामीणों ने जरूरतमंद बच्चों को पेंसिल और अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने की बात कही। उनका कहना था कि दिवंगत व्यक्ति की स्मृति को केवल परंपरागत रस्म तक सीमित रखने के बजाय ऐसा काम किया जाना चाहिए, जिसका फायदा समाज को वर्षों तक मिलता रहे।ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि मृत्यु भोज नहीं, जनसेवा करेंगे, दिखावे पर खर्च नहीं, समाज के भविष्य पर खर्च करेंगे।
पनसलवा के लोगों की यह पहल सामाजिक जागरूकता और सामूहिक सोच का संदेश देती है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि एंबुलेंस और शिक्षा से जुड़ी यह पहल जरूरतमंद परिवारों के लिए सहारा बनेगी और आसपास के गांवों को भी परंपराओं के साथ सामाजिक उपयोगिता को जोड़ने की प्रेरणा देगी।
रिपोर्ट- अमित कुमार