Bihar News: बहन ने दी इकलौते भाई की चिता को मुखाग्नि, राख में सिमट गईं उम्मीदें, सिसक उठा पूरा गांव
Bihar News: जिस इकलौते भाई के साथ छोटी बहन ने बचपन की खुशियां और यादें साझा की थीं,उसी भाई की चिता को बहन ने नम आंखों से मुखाग्नि दी।...
Bihar News: खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित लगार गांव में शुक्रवार का सूरज एक ऐसा प्रलयकारी मंजर लेकर उगा, जिसने पत्थर दिल को भी मोम कर दिया। फिजाओं में सिर्फ चीख-पुकार, सिसकियां और एक लाचार पिता की आहें गूंज रही थीं। जिस आंगन में कल तक भविष्य के सुनहरे सपने गढ़े जा रहे थे, आज वहां मातम का ऐसा सन्नाटा पसरा था कि परिंदे भी पर मारने से कतरा रहे थे। यह कहानी है पंद्रह साल के उस मेधावी छात्र नवनीत कुमार की, जिसकी सांसें गंगा की असीम गहराइयों में थम गईं और पीछे छोड़ गईं सिर्फ अनगिनत आंसू और रूह कंपा देने वाली यादें।
घटना का ताना-बाना गुरुवार को बुना गया, जब लगार पंचायत के वार्ड संख्या-सात का दुलारा, उत्क्रमित उच्च विद्यालय टिमापुर का स्कूल टॉपर नवनीत, गंगा नदी के बाढ़ के आगोश में समा गया। नदी में स्नान के दौरान वह गहरे पानी की भेंट चढ़ गया। जब यह मर्माहत करने वाली खबर गांव में फैली, तो कोहराम मच गया। आपदा मित्रों और ग्रामीणों की शिद्दत भरी तलाश के बाद आखिरकार उसका निष्प्राण शरीर पानी से बाहर निकाला गया। पोस्टमार्टम की कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जब शव घर पहुंचा, तो कोहराम मच गया। दिल्ली से बदहवास दौड़े आए पिता बृजेश यादव ने जब अपने जिगर के टुकड़े को तिरोहित देखा, तो उनका सीना चीख से फट पड़ा। माता की मर्मस्पर्शी चीखें कलेजा चीर रही थीं।
लेकिन इस करुण कहानी का सबसे ह्रदयविदारक और आंखें नम कर देने वाला अध्याय तब लिखा गया जब चिता सजाई गई। समाज की रूढ़ियों और दकियानूसी परंपराओं को दरकिनार करते हुए, उस मासूम बहन मनीषा ने अपने इकलौते भाई की चिता को मुखाग्नि दी, जिसने कभी इसी भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर लंबी उम्र की दुआएं मांगी थीं। जिस भाई के हाथों से उसे जिंदगी भर की हिफाजत का भरोसा था, आज उसी भाई के जिस्म को अग्नि के हवाले करते वक्त उस छोटी सी बच्ची का कांपता हुआ हाथ और बहते हुए अश्क देखकर वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा फट पड़ा। समाज के बंधनों को तोड़कर बहन द्वारा भाई को दी गई यह अंतिम विदाई इंसानियत के जज्बे और बहन के अटूट प्रेम की सबसे दर्दनाक दास्तां बन गई।
नवनीत कोई आम छात्र नहीं था, वह उस परिवार और पूरे गांव का चिराग था जिसने अभी हाल ही में मैट्रिक की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर स्कूल में टॉप किया था। अध्यापकों की उम्मीदें और माता-पिता के अरमान उस होनहार बालक से जुड़े थे। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। महज पंद्रह साल की उम्र में जिंदगी की किताब का यह पन्ना यकायक पलट गया और वह इस जहां को हमेशा के लिए अलविदा कह गया।
आज लगार गांव की हर गली, हर चौपाल पर सिर्फ इसी गमगीन दास्तान की चर्चा है। एक तरफ जहां प्रशासनिक अमला औपचारिकताएं पूरी कर चुका है, वहीं दूसरी तरफ वह घर हमेशा के लिए वीरान हो गया है। मां की आंखों के तारे और बहन के इकलौते सहारे की यह विदाई इस बात की चीखती हुई गवाही है कि मौत उम्र की मोहताज नहीं होती। यह मार्मिक दृश्य लंबे समय तक लोगों के जेहन में एक नासूर की तरह टीसता रहेगा।
रिपोर्ट- अमित कुमार