BNMU में सरकारी फंड से 'भारत विरोधियों' का स्वागत? 44 लाख के सेमिनार पर ABVP का बड़ा हमला, विदेशी वक्ताओं की सूची पर बवाल
मधेपुरा के भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (BNMU) में आगामी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर राष्ट्रविरोधी मानसिकता और भेदभाव का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी
Madhepura : भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (BNMU) के मनोविज्ञान विभाग द्वारा आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने राजनीतिक और सामाजिक तूल पकड़ लिया है। 'प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान' (PM-USHA) के तहत मिले फंड के उपयोग और आमंत्रित वक्ताओं की पृष्ठभूमि को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन को घेरा है।
₹44 लाख के सरकारी फंड पर विवाद
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की PM-USHA योजना के तहत इस सेमिनार के लिए 44 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं । ABVP का आरोप है कि जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी धन का उपयोग ऐसे लोगों को मंच देने के लिए किया जा रहा है जिनकी मानसिकता कथित तौर पर भारत विरोधी है। परिषद ने इसे विश्वविद्यालय प्रशासन का "मानसिक दिवालियापन" करार दिया है।
विदेशी वक्ताओं की सूची पर आपत्ति


25-26 फरवरी 2026 को होने वाले इस हाइब्रिड मोड सम्मेलन के लिए बांग्लादेश, फिलीस्तीन, सऊदी अरब और बहरीन के प्रोफेसरों को वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है ।ABVP का दावा है कि आमंत्रित किए गए कई विदेशी वक्ता भारत विरोधी बयान देने के लिए जाने जाते हैं।
परिषद ने यह भी आरोप लगाया कि वक्ताओं की सूची में आधे से अधिक नाम एक ही विशेष समुदाय से हैं, जो विश्वविद्यालय की "सनातन विरोधी" मानसिकता को दर्शाता है।
विभागों के आवंटन पर उठाए सवाल
एबीवीपी ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि फिजिक्स (भौतिकी) और इंडियन फिलॉसफी (भारतीय दर्शन) जैसे गंभीर विषयों के सेमिनार की जिम्मेदारी उर्दू विभाग को दी गई है। परिषद के अनुसार, यह कदम विश्वविद्यालय की स्पष्ट और पक्षपाती मानसिकता को उजागर करता है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
ABVP उत्तर बिहार के पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मामले में अविलंब स्पष्टीकरण की मांग की है। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो वे "उग्र आंदोलन" के लिए बाध्य होंगे। इस विरोध में पुरुषोत्तम कुमार, राकेश काशी और यज्ञवल्क्य शुक्ला जैसे प्रमुख छात्र नेता शामिल हैं।
क्या है सम्मेलन का विषय?
विवादों के बीच, इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आधिकारिक विषय "वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में मानसिक स्वास्थ्य का महत्व" (Importance of Mental Health in the Present World Scenario) रखा गया है । इसे विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के उत्तर परिसर में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है ।