नियमों के रखवाले या खुद नियम तोड़ने वाले? DDC के सरकारी वाहन का चालान महीनों से पेंडिंग

मधेपुरा जिले में कानून का सख्ती से पालन कराने वाला प्रशासनिक तंत्र ही अब सवालों के घेरे में आ गया है। मामला जिला उप विकास आयुक्त (DDC) के आधिकारिक सरकारी वाहन से जुड़ा है....

नियमों के रखवाले या खुद नियम तोड़ने वाले? DDC के सरकारी वाहन
DDC के सरकारी वाहन का चालान महीनों से पेंडिंग- फोटो : धीरज पराशर

Madhepura : जिले में कानून का सख्ती से पालन कराने वाला प्रशासनिक तंत्र ही अब सवालों के घेरे में आ गया है। ताजा मामला जिला उप विकास आयुक्त (DDC) के आधिकारिक सरकारी वाहन से जुड़ा है, जिसका ट्रैफिक चालान 15 दिसंबर 2025 को कटा था और महीनों बीत जाने के बाद भी अब तक लंबित (पेंडिंग) बना हुआ है।


आम नागरिकों पर सख्ती और सरकारी वाहनों पर ढिलाई

इस मामले के सामने आने के बाद से ही आम जनता के बीच प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर तीखी चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का सवाल है कि जब ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर आम नागरिकों से तुरंत और सख्ती से जुर्माना वसूला जाता है, तो क्या वही नियम और कायदे सरकारी गाड़ियों पर लागू नहीं होते हैं?


महीनों से भुगतान न होने पर उठ रहे गंभीर सवाल

सामान्य तौर पर यदि कोई आम व्यक्ति निर्धारित समय के भीतर अपना चालान नहीं भरता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और वाहन जब्ती जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती है। ऐसे में एक उच्च अधिकारी के सरकारी वाहन का चालान इतने लंबे समय तक बिना भुगतान के लंबित रहना प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।


कानून के समान अनुपालन पर छिड़ी बहस

इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या शासन और प्रशासन से जुड़े लोग कानून से ऊपर हैं। इस तरह की लापरवाही से न केवल आम जनता के बीच गलत संदेश जाता है, बल्कि कानून के समान अनुपालन के दावे भी खोखले साबित होने लगते हैं।


जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी निगाहें 

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है और लंबित पड़े चालान का भुगतान कब तक किया जाता है। क्या इस मामले में किसी स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाएगी या फिर मामला फाइलों में ही दबा रह जाएगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।


धीरज पराशर की रिपोर्ट