मोतिहारी: मंत्रिमंडल विस्तार में चंपारण की अनदेखी, 11 NDA विधायकों के बावजूद एक भी मंत्री नहीं

बिहार सरकार के नए मंत्रिमंडल विस्तार में पूर्वी चंपारण की अनदेखी पर चर्चा तेज। एनडीए के 11 विधायकों में से किसी को भी मंत्री नहीं बनाए जाने से समर्थकों में निराशा झलक रही है। यह विषय जिले के चाय से लेकर पान की दुकानों तक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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मंत्रिमंडल विस्तार में चंपारण की अनदेखी- फोटो : news 4 nation AI

गांधी की कर्मभूमि और बिहार की राजनीति का केंद्र माने जाने वाले पूर्वी चंपारण जिले को नई सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में एक बार फिर उपेक्षा का शिकार होना पड़ा है। यह विषय जिले के चाय से लेकर पान की दुकानों तक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक, किसी भी बड़े चुनावी शंखनाद या राजनीतिक यात्रा की शुरुआत चंपारण से ही करते हैं, लेकिन जब सरकार में प्रतिनिधित्व देने की बारी आई, तो जिले को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। पिछले मंत्रिमंडल की तरह इस बार भी चंपारण का कोई भी चेहरा कैबिनेट में शामिल नहीं हो सका है।


अनुभवी विधायकों की लंबी फेहरिस्त, फिर भी खाली रहा हाथ

पूर्वी चंपारण जिले में एनडीए (NDA) की पकड़ बेहद मजबूत है, जहां से कुल 11 विधायक चुनकर सदन पहुंचे हैं। जिले में सवर्ण, पिछड़ा, अति पिछड़ा और दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई ऐसे चेहरे हैं जो तीन से लेकर छह बार तक चुनाव जीत चुके हैं। प्रमोद कुमार, राणा रणधीर सिंह और कृष्णनंदन पासवान जैसे पूर्व मंत्रियों का ट्रैक रिकॉर्ड भी काफी बेहतर रहा है। इसके बावजूद, इस बार किसी भी वर्ग के अनुभवी जन प्रतिनिधि को कैबिनेट में स्थान नहीं मिलना एनडीए समर्थकों के बीच गहरी निराशा का कारण बन गया है।


कद्दावर नेताओं और महिला प्रतिनिधित्व की अनदेखी

मंत्रिमंडल के गठन में न केवल अनुभवी पुरुषों, बल्कि शिक्षित और प्रभावशाली महिला नेतृत्व की भी अनदेखी की गई है। जेडीयू (JDU) की शिक्षित विधायक शालिनी मिश्रा और चिराग पासवान की पार्टी (LJP-R) के कद्दावर नेता राजू तिवारी जैसे नामों को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी उम्मीदें थीं। समर्थकों का मानना था कि जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए इनमें से किसी को जरूर मौका मिलेगा। जिले के सभी वर्गों के कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर मायूसी है कि इतने बड़े जनादेश के बाद भी जिले का नेतृत्व करने वाला कोई मंत्री सूबे की सरकार में मौजूद नहीं है।


कार्यकर्ताओं में मायूसी, उठ रहे हैं उपेक्षा के सवाल

कैबिनेट विस्तार के बाद पूर्वी चंपारण के एनडीए समर्थकों और आम जनता में यह संदेश जा रहा है कि राजनीतिक रूप से जागरूक इस जिले की उपेक्षा की जा रही है। पक्ष और विपक्ष दोनों के ही समर्थक दबी जुबान में कह रहे हैं कि चंपारण का उपयोग केवल चुनावी रैलियों और प्रतीकों के लिए किया जाता है, जबकि सत्ता के गलियारों में इसे उचित सम्मान नहीं मिल रहा। आगामी चुनावों से पहले इस क्षेत्रीय असंतोष का असर जमीनी राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है, क्योंकि जिले की जनता अपने प्रतिनिधियों को सत्ता के मुख्य मंच पर देखना चाहती थी।

रिपोर्ट - हिमांशु कुमार