Bihar Health Department: बिहार के इस अस्पताल में चपरासी लगाता है सिर पर टांका, रोस्टर में ड्यूटी के बावजूद डॉक्टर साहब गायब, देखिए सरकार
Bihar Health Department: अस्पताल का चतुर्थवर्गीय कर्मचारी सह चपरासी एक मरीज के सिर पर टांके लगाता हुआ नजर आ रहा है।स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
Bihar Health Department: सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और गरीब मरीजों को अस्पताल में मुकम्मल इलाज मुहैया कराने के लाख दावे करती है, लेकिन मोतीहारी के पहाड़पुर पीएचसी से सामने आया एक कथित वायरल वीडियो इन दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वीडियो में अस्पताल का चतुर्थवर्गीय कर्मचारी सह चपरासी कृष्ण कुमार एक मरीज के सिर पर टांके लगाता हुआ नजर आ रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कथित वायरल वीडियो के साथ अस्पताल का डॉक्टर ड्यूटी रोस्टर भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रोस्टर में डॉक्टरों की ड्यूटी के साथ कृष्ण कुमार का नाम भी दर्ज होने का दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि बुधवार और गुरुवार को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक की जिम्मेदारी से जुड़े रोस्टर में उसका नाम अंकित है।
वीडियो सामने आने के बाद लोग स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स का तंज है कि अगर मरीजों का इलाज और टांके लगाने का काम चपरासी ही करेगा तो फिर अस्पताल में डॉक्टरों की जरूरत ही क्या है। गरीब मरीजों की जिंदगी के साथ इस तरह का कथित खिलवाड़ कितना गंभीर है, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि सिर फटने जैसे जख्म में टांके लगाने का काम प्रशिक्षित चिकित्सकीय कर्मी द्वारा किया जाना चाहिए। ऐसे में यदि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति वास्तव में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी है और उसने चिकित्सकीय प्रक्रिया को अंजाम दिया है, तो यह अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
वायरल वीडियो और ड्यूटी रोस्टर को लेकर पहाड़पुर पीएचसी प्रभारी से सवाल किया गया तो उन्होंने पहले वीडियो की जानकारी से इनकार किया। हालांकि, जब डॉक्टरों की ड्यूटी वाले रोस्टर में कृष्ण कुमार का नाम सप्ताह में दो दिन दर्ज होने और उस पर उनके हस्ताक्षर होने के संबंध में सवाल किया गया, तो उन्होंने इस मामले पर स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या पहाड़पुर पीएचसी में डॉक्टरों की गैरमौजूदगी में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी मरीजों का इलाज कर रहे हैं? अगर ऐसा है तो स्वास्थ्य विभाग को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करनी होगी। साथ ही वायरल वीडियो और रोस्टर की वास्तविकता की भी आधिकारिक जांच जरूरी है, ताकि गरीब मरीजों की जिंदगी से जुड़े इस गंभीर मामले की सच्चाई सामने आ सके।
रिपोर्ट- हिमांशु कुमार