Bihar News: सावन में मुंगेर की अनोखी जलेबी, आलू-केले की मिठास, कांवरियों के लिए फलाहार का अनमोल स्वाद

Bihar News: सावन में मुंगेर की अनोखी जलेबी, आलू-केले की मिठा
सावन में अनोखी जलेबी - फोटो : IMTIYAZ

Munger : आपने जलेबी तो बहुत खाई होगी  मैदे से बनी, कलाई की दाल से बनी, कुरकुरी या रसीली। लेकिन क्या आपने कभी फलाहारी जलेबी का स्वाद चखा है? यह कोई आम जलेबी नहीं, यह सावन की सौगात है। मुंगेर के कच्ची कांवरिया पथ की वो खास जलेबी, जो सिर्फ एक महीने के लिए बनाई जाती है। और वो भी सिर्फ शिवभक्तों के लिए। सावन में बाबाधाम की यात्रा पर निकले कांवरियों को अक्सर फलाहार में सीमित विकल्प मिलते हैं। लेकिन मंगल सिंह की दुकान और कारीगर धर्मेंद्र सिंह की मेहनत ने इस कठिनाई को मिठास में बदल दिया।

यह जलेबी न मैदे से बनती है, न बेसन से। बल्कि इसमें पका केला, उबला हुआ आलू, आरारोट, सूखे मेवे और गाढ़ा दूध इस्तेमाल होता है। इन सभी को मिक्सी में पीस कर तैयार किया जाता है एक खास घोल, जो बाद में तला जाता है और फिर डुबोया जाता है गरमा गरम चाशनी में। एक पीस की कीमत है सिर्फ 20 रुपये, लेकिन इसमें जो स्वाद और ऊर्जा है, वो अमूल्य है। इस फलाहारी जलेबी को खाने वाले कांवरियों अखिलेश द्विवेदी, आशीष पांडे, अभय राय जैसे कई शिवभक्तों ने बताया कि इसे खाने से शरीर को ताकत और मन को शांति मिलती है।

देवघर के रास्ते में चलती इस श्रद्धा की रेल में जब कांवरिया थकते हैं, तो ये जलेबी उनके लिए संजीवनी बन जाती है। भूख मिटाने के साथ-साथ यह श्रद्धा में ऊर्जा भी भरती है।

हालाँकि यह जलेबी साल में सिर्फ एक बार मिलती है। सिर्फ सावन में बनती है और सिर्फ कांवरियों के लिए तैयार की जाती है। जलेबी पूरी तरह फलाहारी और शुद्ध शाकाहारी है और मुंगेर के कच्ची कांवरिया पथ पर ही उपलब्ध है। तो इस सावन, अगर आप बाबाधाम जा रहे हैं या भक्ति के पथ पर चल रहे हैं  तो मुंगेर की इस अनोखी जलेबी को जरूर चखिए।ये सिर्फ मिठाई नहीं, एक परंपरा है। एक स्वाद नहीं, एक श्रद्धा है।

रिपोर्ट- मो. इम्तियाज खान