साइबर क्राइम में AI टूल्स का बढ़ता खतरा! जानें कैसे टेक्नोलॉजी के मदद से अपराधी मासूम लोगों की जिंदगी से कर रहे खिलवाड़

साइबर अपराधी AI टूल्स और डीपफेक तकनीक का उपयोग कर ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग और फर्जी तस्वीरें बनाने जैसे अपराध कर रहे हैं। जानें इनसे बचने के तरीके।

साइबर क्राइम
साइबर क्राइम - फोटो : freepik

आज के डिजिटल युग में, साइबर अपराधी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को अपराध का नया अड्डा बना रहे हैं। डीपफेक और अन्य AI टूल्स के जरिए मासूम लड़कियों की तस्वीरों से छेड़छाड़ कर फर्जी न्यूड तस्वीरें बनाई जा रही हैं, जो आगे डार्क नेट पर बेची जाती हैं।यह समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में सामने आए मामलों में, टेलीग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नाबालिग लड़कियों की तस्वीरें मॉर्फ करके उनका दुरुपयोग किया गया।

ब्लैकमेलिंग के खिलाफ कार्रवाई

तत्कालीन साइबर डीएसपी सीमा देवी के अनुसार, 250 से अधिक ब्लैकमेलिंग के मामलों में पीड़ितों की मदद की गई। उनके कार्यकाल के दौरान, 90% मामलों में तुरंत कार्रवाई करके अपराधियों को पकड़ा गया।

NIHER

कैसे होती है ब्लैकमेलिंग?

इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया से तस्वीरें चुराकर मॉर्फ की जाती हैं।एडिटेड तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल किया जाता है।ब्लैकमेल करने वाले अक्सर स्कूल या कॉलेज के छात्र होते हैं।URL ट्रैकिंग से अपराधियों की पहचान कर उनके डिवाइस से डेटा डिलीट कराया जाता है।गंभीर मामलों में FIR दर्ज करके अपराधियों को जेल भेजा जाता है।

Nsmch

AI टूल्स के कारण बढ़ता सेक्सटॉर्शन

साइबर विशेषज्ञ डीएसपी संजीव शेखर झा का कहना है कि AI टूल्स ने साइबर अपराधियों के लिए रास्ता आसान कर दिया है। अब वे आसानी से वीडियो और फोटो एडिट कर ब्लैकमेलिंग कर सकते हैं।कुंभ मेले में कई राजनेताओं, अभिनेताओं और बिजनेसमैन के मॉर्फ किए गए फोटो वायरल किए गए।AI के जरिए किसी का भी चेहरा बदलकर फर्जी अश्लील वीडियो बनाए जा सकते हैं।

डार्क नेट पर बिकती हैं तस्वीरें

साइबर अपराधी डार्क नेट का इस्तेमाल कर नाबालिग लड़कियों और महिलाओं की एडिटेड न्यूड तस्वीरें बेचते हैं। ये अपराध अज्ञात पहचान (Anonymous Identity) और क्रिप्टोकरंसी के माध्यम से किए जाते हैं, जिससे अपराधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

AI टूल्स और डीपफेक से बचाव के उपाय

 निजी तस्वीरें, वीडियो या रील साझा करने से बचें।

 अपना अकाउंट प्राइवेट रखें।

 अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें।

 HTTPS (ताले का आइकन) वाले वेबसाइट ही खोलें।

 अनजान वीडियो कॉल कभी न उठाएं।

 अगर कोई ब्लैकमेल कर रहा है, तो साइबर क्राइम सेल को तुरंत रिपोर्ट करें।

 शिकायत दर्ज कराने में देरी न करें, क्योंकि अपराधी सबूत मिटाने की कोशिश कर सकते हैं।

AI और साइबर क्राइम से जुड़े दो बड़े मामले

महिला की तस्वीरों से बना अश्लील वीडियो

एक महिला के सहकर्मी ने उसके मोबाइल से उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो चुरा लिए।AI टूल्स का उपयोग कर उन्हें अश्लील बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।महिला ने आत्महत्या की कोशिश की, लेकिन समय पर बचा लिया गया।

शादी टूटने का मामला

एकतरफा प्यार में पड़े युवक ने एक लड़की के अश्लील फोटो और वीडियो वायरल कर दिए।इसकी वजह से लड़की की शादी टूट गई।उसने अहियापुर थाने में शिकायत दर्ज कराई और आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

 साइबर अपराधी की करतूत

साइबर अपराधी अब AI टूल्स और डीपफेक का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे ब्लैकमेलिंग और सेक्सटॉर्शन के मामले बढ़ गए हैं। सोशल मीडिया पर सतर्कता रखना, अज्ञात स्रोतों से बातचीत न करना और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत पुलिस की मदद लेना बेहद जरूरी है।