कौशिक वंश की विरासत को कलम का सलाम, मुजफ्फरपुर में ब्रह्मर्षि चेतना का उत्सव, पुस्तक विमोचन में जुटे सियासत और समाज के दिग्गज

Bihar News: मुजफ्फरपुर की धरती एक बार फिर सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत की गवाह बनी...

Celebration of Brahmarshi consciousness in Muzaffarpur
मुजफ्फरपुर में ब्रह्मर्षि चेतना का उत्सव- फोटो : reporter

Bihar News: मुजफ्फरपुर की धरती एक बार फिर सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत की गवाह बनी, जब ब्रह्मर्षि समाज के इतिहास और आत्मबोध को समर्पित कौशिक वंश पर आधारित पुस्तक का भव्य विमोचन किया गया। यह पुस्तक मुजफ्फरपुर के रिटायर प्रोफेसर राम इकबाल शर्मा द्वारा लिखी गई है, जिसका मकसद ब्रह्मर्षि समाज को उसके गौरवशाली अतीत से जोड़ते हुए नई पीढ़ी को जागरूक करना है।

इस मौके पर मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड अंतर्गत हरिपुर कृष्णा गांव में एक विशाल और गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बिहार की सियासत और शिक्षा जगत की कई नामचीन हस्तियां शरीक हुईं। कार्यक्रम में बिहार सरकार के कई पूर्व मंत्री, वर्तमान विधायक, एलएनटी कॉलेज की प्राचार्य समेत बड़ी संख्या में ब्रह्मर्षि समाज के प्रबुद्ध लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सुरेश शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक केवल इतिहास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक वैचारिक हथियार है। उन्होंने कहा, “अक्सर देखा जाता है कि प्रोफेसर रिटायर होने के बाद खुद तक सिमट जाते हैं, लेकिन प्रोफेसर राम इकबाल शर्मा ने समाज के लिए जो बौद्धिक योगदान दिया है, वह मिसाल है। यह किताब युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करेगी।”

वहीं बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और कांटी विधानसभा के वर्तमान विधायक अजीत कुमार ने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि “ब्रह्मर्षि समाज को एक बार फिर आत्मचिंतन और जागरण की ज़रूरत है। आज जिन हालात से समाज गुजर रहा है, उसमें ऐसी किताबें मशाल का काम करेंगी। इस पुस्तक से युवा पीढ़ी को दिशा मिलेगी और अपनी पहचान को समझने का मौका मिलेगा।”

एलएनटी कॉलेज की प्राचार्य ममता रानी ने अपने संबोधन में युवाओं से सीधा संवाद करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी ब्रांडेड कपड़ों और दिखावे में उलझी है, लेकिन उन्हें यह भी याद रखना होगा कि वे एक गौरवशाली ब्रह्मर्षि परंपरा से आते हैं। उन्होंने कहा, “समाज को जिंदा रखने की जिम्मेदारी अब युवाओं के कंधों पर है। अगर युवा जागरूक नहीं होंगे, तो इतिहास सिर्फ किताबों में सिमट कर रह जाएगा।”

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने एक स्वर में प्रोफेसर राम इकबाल शर्मा के प्रयास की सराहना की और कहा कि यह पुस्तक सिर्फ एक समाज नहीं, बल्कि समूचे बिहार की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। कौशिक वंश की यह गाथा अब कलम के ज़रिये नई पीढ़ी तक पहुंचेगी यही इस आयोजन की सबसे बड़ी कामयाबी रही।

 रिपोर्टर: मनी भूषण शर्मा