रेलवे टिकट सिस्टम में सेंध! पवन एक्सप्रेस में पकड़ा गया टिकट टैम्परिंग का खेल, अंतरराज्यीय गिरोह पर शक
Pawan Express Ticket Tampering: जयनगर-लोकमान्य तिलक पवन एक्सप्रेस में टीटीई की सतर्कता से टिकट सिस्टम में छेड़छाड़ का बड़ा खुलासा हुआ है। छपरा स्टेशन पर 4 यात्रियों को गिरफ्तार कर हाजीपुर रेल थाने में एफआईआर दर्ज की गई है
रेलवे के टिकट सिस्टम में हेरफेर और छेड़छाड़ कर अवैध रूप से यात्रा कराने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। जयनगर से लोकमान्य तिलक टर्मिनल जाने वाली ट्रेन संख्या 11062 पवन एक्सप्रेस में रेल पुलिस और टीटीई की सतर्कता से टिकट टैम्परिंग के इस मामले को पकड़ा गया। इस फर्जीवाड़े के आरोप में ट्रेन से चार यात्रियों को गिरफ्तार किया गया है। मुजफ्फरपुर रेल डीएसपी निधि कुमारी ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर हाजीपुर रेल थाना में नामजद प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा: जांच के दौरान सीटीआई को हुआ स्टेशन के नाम पर शक
इस बड़े फर्जीवाड़े को हाजीपुर स्टेशन के समीप तैनात मुख्य टिकट निरीक्षक (CTI) राकेश कुमार सिंह की मुस्तैदी से पकड़ा गया। सीटीआई ने जब पवन एक्सप्रेस के कोच संख्या बी-4 (B-4) की बर्थ संख्या 9, 10, 11 और 12 पर सफर कर रहे यात्रियों के टिकटों की जांच की, तो उन्हें टिकट पर छपे जारीकर्ता स्टेशन (Issuing Station) के नाम में गड़बड़ी और छेड़छाड़ की आशंका हुई। शक होने पर जब टिकट का तकनीकी सत्यापन (Technical Verification) कराया गया, तो रेल प्रशासन के होश उड़ गए।
तकनीकी जांच में खुली पोल: 9 जुलाई की तारीख सही, लेकिन बदल दिए गए थे स्टेशन के नाम
रेलवे की तकनीकी जांच में सामने आया कि टिकटों पर अंकित 9 जुलाई 2026 की जारी होने की तारीख तो बिल्कुल सही थी, लेकिन स्टेशनों के नाम पूरी तरह बदले गए थे। पहले टिकट में वास्तविक जारीकर्ता स्टेशन 'सिद्धीपेट' था, जिसे टैम्परिंग कर दूसरा नाम दे दिया गया था। कोच बी-4 में यात्रा कर रहे मोहम्मद अशरफ अली (दरभंगा), खलीलुर रहमान (पूर्वी चंपारण) और आरिफ आलम के पास यही फर्जी टिकट था। वहीं, कोच बी-2 में सफर कर रहे राम कुमार साहू के पास मिले टिकट की जांच में पता चला कि वह मूल रूप से 'पूर्णा' स्टेशन से जारी हुआ था, लेकिन उस पर भी स्टेशन का नाम बदल दिया गया था।
हाजीपुर में उतरने से किया इनकार: छपरा स्टेशन पर रेल पुलिस ने चारों को दबोचा
रेल डीएसपी निधि कुमारी ने बताया कि टिकट में हेरफेर की पुष्टि होने के बाद हाजीपुर स्टेशन पर ही इन संदिग्ध यात्रियों को ट्रेन से नीचे उतारने की कोशिश की गई थी, लेकिन वे पुलिस और रेल कर्मियों से उलझ गए और नीचे नहीं उतरे। इसके बाद रेल पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए अगले बड़े स्टेशन छपरा में जाल बिछाया। जैसे ही ट्रेन छपरा स्टेशन पहुंची, जीआरपी और आरपीएफ की टीम ने चारों आरोपियों को ट्रेन से उतारकर गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से दो फर्जी टिकट और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।
अंतरराज्यीय गिरोह पर गहराया शक: सीडीआर और तकनीकी साक्ष्यों से रैकेट की तलाश तेज
प्रारंभिक पूछताछ में पकड़े गए आरोपी यह साफ-साफ नहीं बता पा रहे हैं कि उन्होंने ये फर्जी टिकट किस माध्यम से और किस एजेंट से खरीदे थे। इस रहस्यमयी चुप्पी के बाद पुलिस को शक है कि इसके पीछे टिकटों में छेड़छाड़ करने वाला कोई बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह या साइबर अपराधियों का सिंडिकेट काम कर रहा है। रेल डीएसपी ने स्पष्ट किया है कि आरोपियों के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। जांच के दायरे में कई ट्रैवल एजेंट भी हैं, और यदि रेलवे के किसी कर्मचारी की भी संलिप्तता मिली, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
रिपोर्ट - मणिभूषण