बिहार शराबबंदी की खुली पोल: SDO ऑफिस के केबिन में शराब, फाइलों के बीच सजी महफिल!

बिहार में शराबबंदी के बीच अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) पूर्वी के कार्यालय परिसर से शराब पार्टी की तस्वीर वायरल। सरकारी फाइलों के बगल में जाम छलकाने कि कवायद कि तस्वीर वायरल होने से मचा हडकम्प

SDO Office Liquor Party
SDO ऑफिस के केबिन में शराब- फोटो : Reporter

मुजफ्फरपुर में पूर्वी एसडीओ (SDO) कार्यालय परिसर में शराब की खाली बोतलें मिलने का एक वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक तस्वीर ने शराबबंदी के दावों की पोल खोल दी है। बताया जा रहा है कि यह फोटो अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) पूर्वी के कार्यालय परिसर में स्थित एक ऑफिस के केबिन की है। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि जिस टेबल पर सरकारी फाइलें और जरूरी कागजात रखे हैं, वहीं शराब की बोतलें, कोल्ड ड्रिंक और खाने-पीने की सामग्री भी सजी हुई है। कार्यालय जैसी सुरक्षित जगह पर इस तरह की पार्टी होना प्रशासन के लिए बड़ी फजीहत का सबब बन गया है।


कुर्सी-मेज पर फाइलों के बीच सजी महफिल

वायरल तस्वीर में केबिन का नजारा किसी मधुशाला जैसा प्रतीत हो रहा है। केबिन के भीतर कुर्सी और टेबल लगे हैं, जिन पर काम के कागजों के साथ शराब और पानी की बोतलें रखी हुई हैं। किसी ने इस पूरी महफिल को अपने कैमरे में कैद कर लिया, जो अब सार्वजनिक हो चुकी है। इस तस्वीर के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सरकारी दफ्तर के भीतर इतनी निडरता से शराब की पार्टी कैसे आयोजित की गई और इसकी भनक किसी वरीय अधिकारी को क्यों नहीं लगी।


आम जनता के बीच भारी आक्रोश और सवाल

इस फोटो के वायरल होने के बाद आम लोगों ने बिहार में शराबबंदी की सफलता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि शराबबंदी का कानून क्या सिर्फ गरीबों पर कार्रवाई करने के लिए है? स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि जिन अधिकारियों के कंधों पर शराबबंदी को सख्ती से लागू करने की जिम्मेदारी है, उन्हीं के नाक के नीचे उनके कार्यालय परिसर में ही जाम छलकाए जा रहे हैं।


पुरानी फोटो बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश

सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि वायरल हो रही यह तस्वीर कुछ महीने पुरानी हो सकती है। हालांकि, फोटो कितनी भी पुरानी हो, सवाल वहीं का वहीं खड़ा है कि राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद अनुमंडल पदाधिकारी जैसे संवेदनशील कार्यालय परिसर में ऐसी गतिविधियां कैसे मुमकिन हुईं। फिलहाल यह तस्वीर चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

रिपोर्ट - मणिभूषण