Bihar Pending challan settlement: आधे दाम में चालान खत्म करने का बड़ा मौका, लोक अदालत में ट्रैफिक चालानों पर मिलेगी छूट,9 मई को यहां लगेगा विशेष स्टॉल, वाहन चालकों की बल्ले-बल्ले
Bihar Pending challan settlement: 9 मई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत इस बार आम अवाम और खासकर वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत लेकर आ रही है।...
Bihar Pending challan settlement: 9 मई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत इस बार आम अवाम और खासकर वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत लेकर आ रही है। मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर स्टेडियम में लगने वाले विशेष स्टॉल पर ट्रैफिक चालानों का ऑन-द-स्पॉट निपटारा किया जाएगा, जिससे लोगों को वर्षों से लंबित मामलों से निजात मिलने की उम्मीद है।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्वेता कुमारी सिंह ने जिलावासियों से पुरज़ोर अपील की है कि वे इस मौके का भरपूर फायदा उठाएं और सुलहनीय मामलों का आपसी रज़ामंदी से समाधान कराएं। यह पहल न सिर्फ अदालतों का बोझ कम करेगी, बल्कि आम जनता को राहत भी देगी।
इस विशेष अभियान के तहत “एकमुश्त यातायात चालान निपटारा योजना 2026 लागू की गई है, जिसमें 90 दिनों से अधिक पुराने चालानों पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) के मुताबिक यह कदम जनता को कानूनी प्रक्रिया से राहत देने और ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
धारा 179, 180, 181, 183, 184A, 184B, 184E, 190(2) जैसे मामलों में भारी छूट दी गई है। उदाहरण के तौर पर बिना लाइसेंस ड्राइविंग और ओवर स्पीडिंग जैसे मामलों में जुर्माना आधा कर दिया गया है। वहीं हेलमेट, सीट बेल्ट, बिना बीमा जैसे उल्लंघनों में भी आर्थिक राहत दी जा रही है, जिससे आम जनता को सीधा फायदा मिलेगा।
हालांकि कुछ गंभीर मामलों जैसे शराब पीकर गाड़ी चलाना, खतरनाक ड्राइविंग, मोबाइल इस्तेमाल करते हुए ड्राइविंग, ओवरलोडिंग और नाबालिग द्वारा वाहन चलाना में किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। इन मामलों में सख़्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक अहम कदम है। साथ ही जनता से अपील की गई है कि वे आवश्यक दस्तावेज लेकर समय पर स्टॉल पर पहुंचे और यूपीआई या नकद भुगतान के जरिए अपने मामलों का निपटारा सुनिश्चित करें। यह लोक अदालत न सिर्फ आर्थिक राहत का जरिया है बल्कि कानून और अवाम के बीच भरोसे की एक नई कड़ी भी साबित हो सकती है।
रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा