Bihar Electricity:ट्रांसफार्मर लगा, लेकिन कनेक्शन गायब, गायघाट में विभाग का करंटलेस कारनामा, तार लगाना ही भूल गए अफसर
Bihar Electricity: बिजली विभाग की ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने सरकारी दावों की हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कागजों में विकास की फाइल पूरी हो गई, गांव में ट्रांसफार्मर भी खड़ा कर दिया गया...
Bihar Electricity: मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट प्रखंड से बिजली विभाग की ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने सरकारी दावों की हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कागजों में विकास की फाइल पूरी हो गई, गांव में ट्रांसफार्मर भी खड़ा कर दिया गया, लेकिन उसे बिजली से जोड़ने वाले तार ही नहीं लगाए गए। नतीजा यह है कि ट्रांसफार्मर महीनों से सिर्फ 'शो-पीस' बनकर खड़ा है और ग्रामीण अब भी अंधेरे में जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
मामला गायघाट प्रखंड की शिवदहा पंचायत के नवदपुर गांव का है। ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग के बाद बिजली विभाग ने गांव में ट्रांसफार्मर तो स्थापित कर दिया, लेकिन उसके बाद काम अधूरा छोड़ दिया। बिजली आपूर्ति के लिए जरूरी तार नहीं लगाए गए। भीषण गर्मी के बीच गांव के लोग आज भी ढिबरी, लालटेन और मोमबत्ती के सहारे रातें काट रहे हैं, जबकि बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरी लापरवाही के पीछे स्थानीय कनीय अभियंता (JE) की उदासीनता जिम्मेदार है। उनका कहना है कि कई बार विभागीय कार्यालय का चक्कर लगाने और शिकायत करने के बावजूद सिर्फ आश्वासन मिला, लेकिन जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि अधिकारी की बेरुखी के कारण महीनों से ट्रांसफार्मर बिना बिजली के खड़ा है और किसी को इसकी चिंता नहीं है।गांव के लोगों का कहना है कि बड़ी मशक्कत के बाद ट्रांसफार्मर मिला था। उन्हें उम्मीद थी कि अब उनके घर भी रोशन होंगे, लेकिन अधूरा काम उनकी उम्मीदों पर पानी फेर गया। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, गर्मी से बुजुर्ग और महिलाएं परेशान हैं, जबकि रात होते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बिजली के तार जोड़कर आपूर्ति शुरू नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि सिर्फ ट्रांसफार्मर खड़ा कर देने से गांव में बिजली नहीं आती, जब तक उसे चालू नहीं किया जाता।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार 'हर घर बिजली' का दावा कर रही है, तब ऐसी लापरवाही उन दावों की साख पर सवाल क्यों खड़े कर रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या नवदपुर गांव के लोग यूं ही अधूरे विकास और अंधेरे के बीच अपनी जिंदगी गुजारते रहेंगे?
रिपोर्ट- मणिभूष शर्मा