Bihar Health News:सीएम के गृह जिला में प्रसव के दौरान महिला को चढ़ा दिया एचआईवी संक्रमित खून, सदर अस्पताल की घोर लापरवाही हुई उजागर,अब डॉक्टर पर गिरी गाज
Bihar Health News: सीएम के गृह जिला नालंदा जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां सदर अस्पताल में प्रसव के लिए आई एक स्वस्थ महिला को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया। ...
Bihar Health News: सीएम के गृह जिला नालंदा जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां सदर अस्पताल में प्रसव के लिए आई एक स्वस्थ महिला को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया। इस खौफनाक लापरवाही का असर इतना गंभीर रहा कि महिला के साथ-साथ उसी वक्त जन्मा उसका मासूम बच्चा भी एचआईवी संक्रमण की चपेट में आ गया। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में कार्रवाई होने में पूरे पांच साल लग गए, जिसके बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित डॉक्टर के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाया है।
मामला 5 नवंबर 2021 का बताया जा रहा है। उस दिन एक महिला प्रसव के लिए नालंदा सदर अस्पताल में भर्ती हुई थी। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे खून चढ़ाया, लेकिन बाद में जांच में खुलासा हुआ कि उसे जो खून चढ़ाया गया था, वह एचआईवी संक्रमित था। इस लापरवाही ने एक स्वस्थ महिला और उसके नवजात बच्चे की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया।
घटना सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए। जांच में पाया गया कि अस्पताल के ब्लड बैंक में सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन हुआ था। नियमों के मुताबिक किसी भी मरीज को खून चढ़ाने से पहले एलाइजा टेस्ट के जरिए एचआईवी समेत अन्य संक्रमणों की जांच करना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में यह जरूरी प्रक्रिया ही नहीं की गई।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ब्लड बैंक के तत्कालीन प्रभारी चिकित्सक डॉ. राम कुमार प्रसाद ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में भारी लापरवाही बरती। लैब कर्मियों द्वारा दर्ज रक्त संबंधी विवरण का उन्होंने रजिस्टर से मिलान नहीं किया और बिना जरूरी जांच के ही खून मरीज को चढ़ा दिया गया। इस गंभीर चूक ने एक पूरे परिवार की जिंदगी को खतरे में डाल दिया।
इस मामले में पहले ही ब्लड बैंक के लैब टेक्नीशियन संतोष कुमार को दोषी मानते हुए सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। वहीं अब स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. राम कुमार प्रसाद के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए उनकी पेंशन में कटौती का आदेश जारी किया है।
स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव उपेंद्र राम द्वारा जारी आदेश के अनुसार डॉ. राम कुमार प्रसाद के सेवानिवृत्त होने के बाद दो वर्षों तक उनकी पेंशन का पांच प्रतिशत हिस्सा काटा जाएगा। दिलचस्प बात यह भी है कि जांच प्रक्रिया के दौरान ही उन्हें नवादा का सिविल सर्जन बना दिया गया था और बाद में वहीं से वे सेवानिवृत्त हुए।
अब सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी चिकित्सकीय लापरवाही के बाद केवल पेंशन कटौती क्या पर्याप्त सजा है, या फिर स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के लिए और कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
रिपोर्ट- राज पाण्डेय