Bihar School Health: नालंदा में स्कूल बना बीमारी का अड्डा, मिड-डे मील खाने के बाद 60 बच्चे बीमार,अस्पतालों में हड़कंप, गंभीर छात्र सदर अस्पताल रेफर

Bihar School Health:स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद एक-एक कर बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए।...

Mid Day Meal Turns Risky  33 Students
मिड-डे मील खाने के बाद 60 बच्चे बीमार- फोटो : social Media

Bihar School Health:  नालंदा जिले से एक बेहद चिंताजनक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जहां नगरनौसा प्रखंड के मध्य विद्यालय कैला में फूड प्वाइजनिंग की घटना ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद एक-एक कर बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए।

जानकारी के मुताबिक, कुल 60 छात्र-छात्राओं को अचानक पेट दर्द, उल्टी और चक्कर जैसी शिकायतें होने लगीं। स्थिति बिगड़ने पर स्कूल प्रशासन और स्थानीय लोगों की मदद से सभी बच्चों को आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले कुछ बच्चों ने हल्की तबीयत खराब होने की शिकायत की थी, लेकिन कुछ ही देर में कई छात्र एक साथ बीमार पड़ गए, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। शिक्षक और ग्रामीण तुरंत बच्चों को अस्पताल पहुंचाने में जुट गए।

नगरनौसा प्रखंड के मध्य विद्यालय कला कैला में बुधवार को मिड-डे मील खाने के बाद करीब 50 से 60 बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। भोजन करने के कुछ ही देर बाद बच्चों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत होने लगी। कई बच्चे बेहोश होकर गिर पड़े। घटना के बाद विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में सभी बच्चों को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) नगरनौसा और चंडी रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर रूप से बीमार एक छात्रा को बेहतर इलाज के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल रेफर किया गया है।

घटना की सूचना मिलते ही दोनों अस्पतालों में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया। जैसे ही परिजनों को बच्चों के बीमार होने की जानकारी मिली, वे घबराए हुए अस्पतालों की ओर दौड़ पड़े। अस्पताल परिसर में बच्चों के परिजनों की भारी भीड़ जुट गई। चिकित्सकों की टीम लगातार बच्चों के इलाज में जुटी रही।पांचवीं कक्षा की छात्रा अमृता कुमारी ने बताया कि मिड-डे मील में बच्चों को चावल और चने (छोला) की सब्जी परोसी गई थी। उसका आरोप है कि भोजन में किसी दवा जैसी गोली दिखाई दी थी। भोजन करने के बाद कई बच्चों की तबीयत अचानक खराब होने लगी।छात्राओं ने बताया कि रोजाना की तरह इस बार भोजन परोसने से पहले शिक्षकों द्वारा भोजन का स्वाद परीक्षण (टेस्टिंग) नहीं किया गया था। हालांकि बाद में अमरेश सर नामक एक शिक्षक ने भोजन खाया, जिसके बाद उन्हें भी चक्कर आने लगा और उन्हें भी इलाज के लिए अस्पताल पहुंचना पड़ा।

घटना के बाद मिड-डे मील की आपूर्ति करने वाली संस्था एकता फाउंडेशन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों ने संस्था पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि भोजन की गुणवत्ता की समुचित जांच किए बिना बच्चों को खाना परोस दिया गया, जिसके कारण इतनी बड़ी संख्या में बच्चे बीमार पड़ गए। लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।अस्पताल में भर्ती बच्चों में अमृता कुमारी, अंकुश कुमार, अनुराधा कुमारी, तमन्ना, निशु, मुस्कान, कृति, ऋषि, आरती, सिमरन, खुशी, आदित्य, प्रियांशु, प्रिय, दीपक, प्रीति, डोली, सौरभ, किरण और राधा कुमारी समेत तीन दर्जन से अधिक अन्य बच्चे शामिल हैं।विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रजनी कुमारी ने बताया कि मिड-डे मील में बच्चों को छोला और चावल परोसा गया था। भोजन शुरू करने के कुछ ही समय बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। कई बच्चों को उल्टी-दस्त होने लगे, जबकि कुछ बच्चे चक्कर खाकर बेहोश हो गए। स्थिति को देखते हुए तत्काल सभी बच्चों को अस्पताल भेजा गया। उन्होंने बताया कि घटना की लिखित सूचना विभाग के वरीय अधिकारियों को दे दी गई है।

डॉक्टरों के मुताबिक कुछ बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर किया जा रहा है। अस्पताल में अचानक इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के पहुंचने से मेडिकल स्टाफ भी अलर्ट मोड में आ गया है।इधर घटना की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग और प्रशासन में भी हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि मिड-डे मील में इस्तेमाल किए गए भोजन या सामग्री में गड़बड़ी हो सकती है, हालांकि असली कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के भोजन में लापरवाही बार-बार सामने आती है, लेकिन उसके बावजूद जिम्मेदार व्यवस्था में सुधार नहीं होता। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर मासूम बच्चों की सेहत के साथ ऐसा खिलवाड़ कब तक चलता रहेगा।

फिलहाल सभी प्रभावित बच्चों का इलाज जारी है और प्रशासन की टीम मामले की जांच में जुट गई है। स्कूल में खाने के सैंपल भी जांच के लिए भेजे जाने की बात कही जा रही है।यह घटना एक बार फिर मिड-डे मील व्यवस्था की हकीकत पर सवाल खड़े करती है, जहां पेट भरने की योजना कभी-कभी खुद बीमारियों का कारण बनती नजर आती है।

रिपोर्ट- राज पाण्डेय