नालंदा के शीतला मंदिर में भगदड़ से 8 की मौत, आस्था बनी दर्दनाक हादसा, दर्जनों लोग ज़ख्मी

Bihar Stampede: बिहार के नालंदा में वो मंजर सामने आया, जिसने आस्था को मातम में बदल दिया।

Nalanda Stampede 8 Dead as Devotion Turns Tragic
शीतला मंदिर में भगदड़ से 8 की मौत- फोटो : reporter

Bihar Stampede: बिहार के नालंदा में वो मंजर सामने आया, जिसने आस्था को मातम में बदल दिया। दीपनगर थाना इलाके के मघड़ा गांव स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिरजहां लोग कृपा की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं वहीं अचानक ख़ौफ़ और अफ़रा-तफ़री का ऐसा तूफ़ान उठा कि 8 बेगुनाह की मौत हो गईं। मरने वालों में 7 महिलाएं शामिल हैं, जबकि दर्जनों लोग ज़ख्मी होकर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

मंदिर परिसर में भारी भीड़ जमा थी। हर तरफ या माता दी की सदाएं, मन्नतों की दुआएं और श्रद्धा का सैलाब उमड़ रहा था। मगर इसी दरमियान अचानक धक्का-मुक्की का सिलसिला शुरू हुआ पहले हल्की अफरातफरी, फिर बेकाबू भगदड़। लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए, कोई चीख रहा था, कोई मदद के लिए पुकार रहा था, लेकिन हालात इतने बिगड़ चुके थे कि इंसानियत भी बेबस नजर आई।

इस खौफनाक भगदड़ में कई श्रद्धालु जमीन पर गिरकर कुचल गए। दो महिलाओं ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि बाकी ने अस्पताल पहुंचने से पहले या इलाज के दौरान अपनी सांसें गंवा दीं। मंदिर का पवित्र आंगन, जो कभी भक्ति और सुकून का प्रतीक था, वह अचानक “मौत का अखाड़ा” बन गया।

बता दें यह मंदिर कोई मामूली मंदिर नहीं, बल्कि एक सिद्धपीठ है, जहां चर्म रोगों और बच्चों की बीमारियों से निजात पाने की गहरी मान्यता है। पंचाने नदी के किनारे बसे इस पवित्र स्थल का इतिहास सदियों पुराना है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में विदेशी यात्री ह्वेनसांग भी यहां आकर इबादत कर चुके हैं और अपनी रचनाओं में इसका ज़िक्र किया है।

शीतलाष्टमी मेले के मद्देनज़र यहां पहले से ही भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी।शीतलाष्टमी मेला के दिन मघड़ा और इसके आसपास के दर्जनों गांवों में चूल्हा नहीं जलता है। लोग एक दिन पहले ही खाना बनाकर दूसरे दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। शीतला मंदिर के पुजारी ने बताया कि चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी के दिन यहां देश के कोने-कोने से लोग पूजा अर्चना करने आते हैं। व्रत की विशेषता यह कि इसमें शीतला देवी को भोग लगाने वाला पदार्थ एक दिन पहले ही बना लिया जाता है। वासी भोग लगाने की परंपरा है। चैत्र अष्टी के मौके पर मां शीतला की पूजा-अर्चना के लिए सूबे के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड, बंगाल और उत्तर प्रदेश से भी काफी संख्या में श्रद्धालुओं आते हैं।मघड़ा गांव में काफी पुराना मिट्ठी कुआं है। इसी कुएं के पानी से सप्तमी की शाम में बसिऔरा के लिए भोजन तैयार किया जाता है। प्रसाद में अरवा चावल, चने की दाल, सब्जियां, पुआ, पकवान आदि बनाया जाता है। खास बात यह कि मां शीतला मंदिर में दिन में दीपक नहीं जलते हैं। धूप, हुमाद व अगरबत्ती जलाना भी मना है।

 दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु, व्रत-पूजा और वासी भोग की परंपरा निभाने पहुंचे थे। मगर इंतजामात की कमी और भीड़ के बेकाबू हो जाने ने इस आस्था के मेले को “खौफनाक हादसे” में तब्दील कर दिया। अब सवाल उठता है क्या यह सिर्फ हादसा था या लापरवाही का नतीजा? क्या प्रशासन ने भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त इंतज़ाम किए थे? फिलहाल गांव में मातम पसरा है, और हर आंख नम है। जो लोग मन्नत मांगने आए थे, वो अपने अपनों की शव लेकर लौट रहे हैं।

रिपोर्ट- राज पाण्डेय