Rajgir Malmas Mela: हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा राजगीर! गुरु नानक कुंड में शाही स्नान से शुरू हुआ आस्था का पर्व, साधु-संत और श्रद्धालुओं ने गुरु नानक कुंड में किया पहला शाही स्नान, जानिए प्रमुख स्नान की तिथियां
Rajgir Malmas Mela: नालंदा जिले में स्थित राजगीर एक बार फिर आस्था, भक्ति और अध्यात्म के महासागर में डूब गया है। मलमास मेले के पहले शाही स्नान के अवसर पर बुधवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे वातावरण को दिव्य ऊर्जा से भर दिया।...
Rajgir Malmas Mela: नालंदा जिले में स्थित राजगीर एक बार फिर आस्था, भक्ति और अध्यात्म के महासागर में डूब गया है। मलमास मेले के पहले शाही स्नान के अवसर पर बुधवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे वातावरण को दिव्य ऊर्जा से भर दिया।
ब्रह्म मुहूर्त से ही साधु-संतों और श्रद्धालुओं का सैलाब पवित्र कुंडों की ओर उमड़ पड़ा। पुरुषोत्तमी एकादशी और स्वार्थ सिद्धि योग के पावन संयोग में शुरू हुए इस शाही स्नान में देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। पुरुषोत्तमी एकादशी एवं स्वार्थ सिद्धि योग के पावन संयोग पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में शाही स्नान की शुरुआत हुई, जो दोपहर एक बजे तक चलेगी। शाही स्नान में विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों, महंतों और देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। जिला प्रशासन के अनुसार इस अवसर पर करीब 2 से ढाई लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।शाही स्नान को लेकर मंगलवार की रात से ही राजगीर में श्रद्धालुओं और साधु-संतों का आगमन शुरू हो गया था। सुबह ब्रह्मकुंड और अन्य पवित्र कुंडों के आसपास श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। श्रद्धालुओं को निर्धारित मार्गों से कतारबद्ध कर कुंडों तक पहुंचाया जा रहा है। मेले में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सभी प्रमुख स्नान स्थलों, मार्गों और मेला क्षेत्र में पुलिस बल, दंडाधिकारी तथा स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। प्रत्येक अखाड़े के साथ एक मजिस्ट्रेट और पुलिस पदाधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि शाही स्नान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

शाही स्नान की विधिवत शुरुआत उदासीन अखाड़े के संतों द्वारा की गई। इसके बाद विभिन्न अखाड़ों और संप्रदायों के साधु-संत पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, ध्वज-पताकाओं और जयघोष के साथ स्नान यात्रा में शामिल हुए। इस भव्य आयोजन में खाक चौक, बड़ी संगत, धनियां पहाड़ी संगत, रजौली संगत, कैलाश आश्रम, कबीर पंथी, फलाहारी बाबा संप्रदाय तथा सखी संप्रदाय के झुनकिया बाबा समेत कई अखाड़ों के महंत और संत भाग ले रहे हैं। संतों के जत्थों के आगमन से पूरा मेला क्षेत्र धार्मिक रंग में रंगा नजर आया।

शाह स्नान को लेकर जिला प्रशासन ने साधु-संतों के लिए विशेष व्यवस्था की है। अखाड़ों के साधु-संतों के जत्थों को निर्धारित रेड कॉरिडोर से होकर सीधे ब्रह्मकुंड तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि वे बिना किसी व्यवधान के पवित्र स्नान कर सकें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि साधु-संतों के शाही स्नान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आम श्रद्धालुओं के लिए ब्रह्मकुंड परिसर को खोला जाएगा। इससे परंपरा का निर्वहन होने के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन में भी सुविधा होगी।

परंपरा के अनुसार साधु-संतों का पहला स्नान गुरुनानक कुंड में हुआ। इसके बाद संतों का जत्था सरस्वती नदी, सप्तधारा होते हुए मुख्य ब्रह्मकुंड पहुंचा, जहां पवित्र स्नान और विशेष पूजा-अर्चना के साथ अनुष्ठान संपन्न किया गया। स्नान के दौरान श्रद्धालुओं ने भी पवित्र कुंडों में आस्था की डुबकी लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और मंगलकामना की।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या अव्यवस्था को रोकने के लिए पूरे कुंड परिसर, मेला क्षेत्र और प्रमुख मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल, दंडाधिकारी और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा श्रद्धालुओं की सहायता और मार्गदर्शन के लिए ‘आपदा मित्र’ एवं ‘विकास मित्र’ कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देकर सेवा में लगाया गया है। ये कर्मी श्रद्धालुओं को सही मार्ग बताने, भीड़ नियंत्रण में सहयोग करने तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का कार्य कर रहे हैं।

राजगीर मलमास मेले का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व देशभर में विशेष माना जाता है। मान्यता है कि मलमास के दौरान 33 करोड़ देवी-देवता राजगीर में निवास करते हैं और यहां के पवित्र गर्म जलकुंडों में स्नान करने से मनुष्य के पापों का क्षय होता है तथा उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के कारण हर तीसरे वर्ष आयोजित होने वाले इस मेले में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
15 जून तक चलने वाले इस मेले में राजगीर के 22 पवित्र गर्म जलकुंडों और 52 धाराओं में स्नान का विशेष महत्व है। इस दौरान तीन शाही स्नान समेत कई धार्मिक अनुष्ठान और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मेले में बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल और श्रीलंका से भी साधु-संत एवं श्रद्धालु पहुंचे हैं। पर्यटन विभाग और नालंदा जिला प्रशासन द्वारा पेयजल, स्वास्थ्य शिविर, प्रकाश व्यवस्था, नियंत्रण कक्ष, साफ-सफाई और आपातकालीन सेवाओं की व्यापक व्यवस्था की गई है।
पहले शाही स्नान के साथ आगामी दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ेगी तथा राजगीर एक बार फिर धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र बनेगा।
प्रमुख स्नान तिथियां :
31 मई – दूसरा शाही स्नान (पूर्णिमा)
5 जून – पंचमी स्नान
11 जून – तीसरा शाही स्नान (पुरुषोत्तमी एकादशी)
15 जून – अमावस्या स्नान एवं देवताओं का विसर्जन, मेला समापन।
रिपोर्ट- राज पाण्डेय