Bihar Politics : पंचायत चुनाव को लेकर नवादा में प्रशांत किशोर ने की बैठक, कहा– 'बिहार की राजनीति पर सिर्फ 1200 परिवारों का कब्जा'
Bihar Politics : जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने नवादा में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की. उन्होंने कहा की बिहार की राजनीति में 12 सौ परिवारों का कब्ज़ा है........पढ़िए आगे
NAWADA : नवादा के प्रसाद बीघा में जन सुराज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। लगभग साढ़े तीन घंटे चली इस बैठक में आगामी पंचायत चुनाव पर गहन चर्चा हुई। प्रशांत किशोर ने कार्यकर्ताओं से कहा कि जन सुराज हर पंचायत में मजबूत उम्मीदवार उतारेगा, ताकि जनता को बेहतर विकल्प मिल सकें। कार्यकर्ताओं ने बैठक में शिक्षा, रोजगार सृजन, युवाओं का पलायन रोकने, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का सुझाव दिया। प्रशांत किशोर ने संगठन की रणनीति पर जोर देते हुए कहा कि उम्मीदवार चयन में योग्यता और जनसंपर्क को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
जन सुराज के संस्थापक और नवादा विधानसभा से पूर्व उम्मीदवार सहित कई प्रमुख लोग भी बैठक में मौजूद थे। प्रशांत किशोर ने बताया कि 2025 विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए नवादा जैसे जिलों में उनके लगातार दौरे जारी रहेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे बार-बार नवादा आकर संगठन को नई ऊर्जा देंगे।
बैठक के दौरान प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत कुमार पर परिवारवाद को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि जो जीवनभर परिवारवाद विरोधी दिखते रहे, अब उनका बेटा भी राजनीति में सक्रिय है। किशोर ने 'नेता का बेटा नेता ही बनेगा' वाली अपनी पुरानी आलोचना को दोहराया। प्रशांत किशोर ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पिछले 30 सालों में बिहार की राजनीति में केवल लगभग 1200 परिवारों के लोग ही सांसद, विधायक या मंत्री बने हैं। वहीं, आम गरीब युवा दूसरे राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर हैं। उन्होंने इस बयान को बिहार की राजनीति में वंशवाद पर बहस छेड़ने वाला बताया।
प्रशांत किशोर ने बताया कि उनका मुख्य फोकस अब पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों पर है। उन्होंने कहा कि हर पंचायत में उम्मीदवार उतारकर जनता के बीच एक नया विकल्प पेश किया जाएगा। नवादा जैसे जिलों में नियमित उपस्थिति से जन सुराज को ताकत मिलेगी। जन सुराज का दावा है कि यह अभियान बिहार में एक नई राजनीतिक संस्कृति लाएगा, जहाँ परिवारवाद के बजाय योग्यता, पारदर्शिता और विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।
अमन सिन्हा की रिपोर्ट