Bihar Politics : बिहार कांग्रेस में बड़े बदलाव की तैयारी, 29 केंद्रीय पर्यवेक्षक चुनेंगे नए जिलाध्यक्ष, मीडिया पैनल की भी घोषणा

Bihar Politics : बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है. इसी कड़ी में नये जिलाध्यक्ष भी चुने जायेंगे. जिसके लिए 29 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गयी है......पढ़िए आगे

Bihar Politics : बिहार कांग्रेस में बड़े बदलाव की तैयारी, 29
कांग्रेस में बदलाव की तैयारी - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद अब कांग्रेस आलाकमान संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए 'संगठन सृजन अभियान' पर जोर दे रहा है। इसी कड़ी में बिहार कांग्रेस में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य के सभी जिलों में नए अध्यक्ष के चयन किये जायेंगे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने इसके लिए 29 केंद्रीय पर्यवेक्षकों को तैनात किया है। 

संगठन सृजन अभियान और नई नियुक्तियां

कांग्रेस का यह नया प्रयोग केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में प्रखंड और राज्य स्तर पर भी इसी तर्ज पर बदलाव किए जाएंगे। बिहार के लिए नियुक्त किए गए 29 पर्यवेक्षकों की सूची में भजनलाल जाटव, अंबा प्रसाद, डॉ. रागिनी नायक, आफताब अहमद और संजय कपूर जैसे दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं। इन पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारी जिला अध्यक्षों के चयन में निष्पक्षता और योग्यता सुनिश्चित करना है।

मीडिया और कम्युनिकेशन टीम का गठन

पार्टी ने मीडिया और जनसंवाद को बेहतर बनाने के लिए एक 'कम्युनिकेशन स्ट्रेटजी ग्रुप' की घोषणा की है। इस समूह में विधायक शकील अहमद खान और सांसद रंजीता रंजन के साथ-साथ डॉ. चंदन यादव, पीसी मिश्रा, संजीव सिंह, सरबत जहां फातिमा और डॉ. अजय उपाध्याय को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। यह टीम पार्टी की विचारधारा और सरकार की विफलताओं को जनता के बीच प्रभावी ढंग से रखने की रणनीति तैयार करेगी।

प्रवक्ताओं और पैनलिस्टों की नई फौज

बिहार कांग्रेस ने अपने मीडिया पैनल का भी विस्तार किया है। राजेश राठौड़, अमिता भूषण, विधायक आनंद शंकर, डॉ. प्रतिमा दास, पूर्व विधायक अमित कुमार टुन्ना और डॉ. राजीव रंजन प्रसाद सहित 10 नेताओं को प्रदेश प्रवक्ता बनाया गया है। वहीं, हसनैन कैसर, गुंजन पटेल, नवनीत कुमार और ज्ञान रंजन सहित 9 नेताओं को मीडिया पैनलिस्ट के तौर पर शामिल किया गया है। इस नई टीम में युवा और अनुभवी चेहरों का संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।

पुरानी व्यवस्था पर प्रहार

लंबे समय से बिहार में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति प्रदेश अध्यक्षों के विवेक पर निर्भर रहती थी। वर्तमान अध्यक्ष राजेश राम के कार्यकाल में भी यही चलन दिखा, लेकिन अब केंद्रीय आलाकमान ने पर्यवेक्षकों के जरिए इस प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि इस बदलाव से उन कार्यकर्ताओं को ऊर्जा मिलेगी जो लंबे समय से दरकिनार महसूस कर रहे थे। आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस की यह 'सर्जरी' कितनी सफल होती है, यह आने वाला वक्त बताएगा।