Patna High Court: सट्टे के 50 रुपए से उठा था खून का तूफान, 29 साल बाद पटना हाईकोर्ट ने छह लोगों के सजा को किया रद्द

Patna High Court:पटना हाईकोर्ट ने 1996 के एक पुराने आपराधिक मामले में ऐसा अहम फैसला सुनाया है, जिसने निचली अदालत की सजा पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया।...

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29 साल बाद पटना हाईकोर्ट ने छह लोगों के सजा को किया रद्द - फोटो : social Media

Patna High Court:पटना हाईकोर्ट ने 1996 के एक आपराधिक मामले महत्त्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को रद्द कर दिया है। जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की एकलपीठ ने करण चौधरी समेत अन्य सजायाफ्ताओं की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए सभी को बरी करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि मामले में प्रस्तुत गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते। जांच के दौरान कई अहम कड़ियां अधूरी रह गईं और स्वतंत्र गवाहों ने भी अभियोजन का साथ नहीं दिया। इन परिस्थितियों में दोषसिद्धि को कायम रखना न्यायोचित नहीं है।यह मामला 9 जून 1996 का है। भागलपुर जिले के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में ₹50 की कथित सट्टेबाजी को लेकर विवाद हुआ था। 

 इसमें ये आरोप था कि इसी विवाद के बाद छह लोगों ने मिलकर अरविंद कुमार सैनी पर लाठी, कुल्हाड़ी और खंती से हमला किया। आरोपियों पर मारपीट, आभूषण छीनने और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया था।

इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश, भागलपुर ने 29 अगस्त ,2009 को आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 307/149, 148, 147, 323/149 और 379 के तहत दोषी ठहराते हुए अलग-अलग सजाएं सुनाई थीं।पटना हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई के दौरान पाया कि छह हमलावरों के आरोप के बावजूद मेडिकल रिपोर्ट में केवल एक ही चोट दर्ज है। एफआईआर दर्ज करने में देरी को लेकर भी गंभीर विरोधाभास सामने आए। 

अपील की सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन ने छह हमलावरों की बात कही, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में केवल एक ही चोट दर्ज थी। इतना ही नहीं, एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी को लेकर भी गंभीर विरोधाभास सामने आए, जिनका संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका। इन तमाम खामियों ने अभियोजन की कहानी को कमजोर कर दिया।