AAP नेता डॉ. राजेश रत्नाकर को मिली जान से मारने की धमकी, जांच में जुटी पुलिस
Patna : पटना के मोकाम से कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिहार विधानसभा चुनाव के आम आदमी पार्टी के पूर्व प्रत्याशी डॉ. राजेश कुमार रत्नाकर को मोबाइल फोन पर सरेआम जान से मारने की धमकी दी गई है। इस घटना ने क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और राजनीतिक गलियारों में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। पीड़ित डॉक्टर ने मोकामा थाना प्रभारी को लिखित आवेदन देकर अपनी जान की सुरक्षा की गुहार लगाई है और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
कॉल रिकॉर्ड करने की दी खुली चुनौती
डॉ. राजेश रत्नाकर द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, 28 अप्रैल 2026 की सुबह लगभग 10:15 बजे उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने न केवल उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि बेहद आक्रामक लहजे में कहा, “अब तुम इस धरती पर नहीं रहोगे, जो करना है कर लो।” अपराधी का दुस्साहस इतना था कि उसने डॉक्टर को कॉल रिकॉर्ड करने तक की खुली चुनौती दे डाली, जो क्षेत्र में अपराधियों के बेखौफ होने का प्रमाण है।
कॉल डिटेल (CDR) से पहचान करने की मांग
पीड़ित डॉक्टर ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि संबंधित मोबाइल नंबर (+91 96938 08244) का तत्काल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाला जाए ताकि धमकी देने वाले की पहचान हो सके। उन्होंने आशंका जताई है कि यदि समय रहते आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है। डॉ. रत्नाकर ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि एक सार्वजनिक व्यक्ति को इस तरह की धमकी मिलना पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर एक गंभीर सवालिया निशान है।
पुलिस की नजर में मामला संदिग्ध, जांच जारी
इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर मोकामा थाना प्रभारी कुणाल कुमार ने बताया कि पुलिस को लिखित शिकायत प्राप्त हुई है। हालांकि, उन्होंने प्राथमिक तौर पर मामले को कुछ हद तक संदिग्ध बताया है और कहा है कि धमकी देने के पीछे के कारणों का अब तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुलिस तकनीक की मदद से मोबाइल नंबर को ट्रेस कर रही है और हर संभावित बिंदु पर गहराई से छानबीन की जा रही है ताकि मामले की सच्चाई सामने आ सके।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल
मोकामा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में एक पूर्व प्रत्याशी और चिकित्सक को इस तरह धमकी मिलना पुलिसिया इकबाल को खुली चुनौती माना जा रहा है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि जब सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोग ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों का क्या होगा? फिलहाल, मोकामा पुलिस के लिए आरोपी की गिरफ्तारी और घटना के पीछे की सच्चाई उजागर करना एक बड़ी चुनौती बन गई है।
रविशंकर कुमार की रिपोर्ट