अनंत सिंह की शपथ पर सस्पेंस खत्म: मंगलवार को लेंगे विधायक पद की शपथ, पटना कोर्ट ने दी हरी झंडी

बिहार की सियासत में 'छोटे सरकार' के नाम से मशहूर बाहुबली नेता अनंत सिंह के शपथ ग्रहण को लेकर जारी सस्पेंस अब खत्म हो गया है। दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना की बेऊर जेल में बंद नवनिर्वाचित विधायक अनंत सिंह मंगलवार को विधानसभा सदस्य के रूप में पद और

अनंत सिंह की शपथ पर सस्पेंस खत्म: मंगलवार को लेंगे विधायक पद

Patna - : मोकामा से नवनिर्वाचित विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह के शपथ ग्रहण को लेकर चल रहा लंबा इंतजार अब खत्म होने वाला है। दुलारचंद यादव हत्याकांड में जेल में बंद अनंत सिंह को पटना सिविल कोर्ट से बड़ी राहत मिली है, जिसके बाद उनके मंगलवार को विधायक पद की शपथ लेने का रास्ता साफ हो गया है। 

कोर्ट के फैसले से खुला शपथ का रास्ता

जदयू (JDU) विधायक अनंत सिंह, जो वर्तमान में दुलारचंद यादव हत्याकांड के सिलसिले में न्यायिक हिरासत में हैं, ने विधायक पद की शपथ लेने के लिए अदालत से अनुमति मांगी थी। पटना सिविल कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की अनुमति प्रदान कर दी है। इससे पहले निचली अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिससे उनकी विधायकी की शपथ पर संकट मंडरा रहा था। 

दुलारचंद हत्याकांड और जेल का सफर

अनंत सिंह पर मोकामा विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। 30 अक्टूबर 2025 को हुई इस हत्या के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह को मतदान से पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तब से वे पटना की बेऊर जेल में बंद हैं और कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। 

कड़ी सुरक्षा के बीच होगी शपथ

अदालती आदेश के आलोक में, अनंत सिंह को मंगलवार को जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच बिहार विधानसभा लाया जाएगा। चूँकि वे न्यायिक हिरासत में हैं, इसलिए पूरी प्रक्रिया पुलिस की निगरानी में संपन्न होगी। शपथ ग्रहण के बाद उन्हें पुनः जेल वापस ले जाया जाएगा। उनके समर्थकों के बीच इस खबर को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। 

'छोटे सरकार' का सियासी रसूख

अनंत सिंह ने एक बार फिर जेल में रहते हुए अपनी लोकप्रियता साबित की है। मोकामा विधानसभा सीट से उन्होंने भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की, जहाँ उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी वीणा देवी को करारी शिकस्त दी थी। यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने जेल से चुनाव जीता है; 2020 में भी उन्होंने इसी तरह जीत दर्ज की थी और पैरोल पर शपथ ली थी।  

कानूनी प्रक्रिया और आगे की राह

हालांकि कोर्ट ने उन्हें शपथ लेने की अनुमति दे दी है, लेकिन दुलारचंद हत्याकांड में उन्हें अब तक नियमित जमानत नहीं मिली है। सिविल कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज होने के बाद उनके वकीलों ने पटना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विधायक के रूप में शपथ लेने के बाद भी उन्हें जेल में ही रहना होगा जब तक कि उच्च न्यायालय से उन्हें राहत नहीं मिल जाती।