Bihar Politics News: सम्राट चौधरी का बड़ा सियासी दांव! अनंत सिंह और चेतन आनंद को बड़ी सौगात, मिली अहम जिम्मेदारी

Bihar Politics News: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक और सियासी बदलाव देखने को मिला है।

Samrat Choudhary Big Political Move Anant singh wife Neelam
अनंत सिंह और चेतन आनंद को सम्राट सरकार से बड़ी सौगात- फोटो : social Media

Bihar Politics News: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक और सियासी बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जनता दल यूनाइटेड  के विधायक चेतन आनंद को राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति का सदस्य नियुक्त किया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।यह समिति हाल ही में पुनर्गठित की गई है, जिसके अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी होंगे, जबकि उपाध्यक्ष के रूप में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। वहीं कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी को सौंपी गई है।अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी और चेतन आनंद को सम्राट सरकार से बड़ी सौगात दी है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार इस समिति के सदस्यों को उप मंत्री का दर्जा मिलेगा।

समिति में कुल 12 सदस्य शामिल किए गए हैं, जिनमें कई विधायक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली चेहरे हैं। चेतन आनंद के अलावा संगीता कुमारी, भरत बिंद, मुरारी प्रसाद गौतम, सिद्धार्थ सौरव, ललन कुमार मंडल, प्रहलाद यादव, जगन्नाथ ठाकुर, राजेश कुमार वर्मा, भारती मेहता और चंदन कुमार सिंह जैसे नाम शामिल हैं। इसके साथ ही मोकामा से अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को भी समिति में जगह दी गई है।

सरकारी अधिसूचना के अनुसार इस समिति के सदस्यों को उप मंत्री का दर्जा मिलेगा। यानी विधायक या एमएलसी होने की स्थिति में उन्हें पहले से मिल रही सुविधाओं के साथ अतिरिक्त सरकारी लाभ भी प्राप्त होंगे। वहीं उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री के बराबर सुविधाएं दी जाएंगी।

बिहार मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। बताया जा रहा है कि समिति में आगे भी कुछ और नाम जोड़े जा सकते हैं और रिक्त पदों पर बाद में मनोनयन किया जाएगा।

इस फैसले के राजनीतिक मायने भी गहरे माने जा रहे हैं, खासकर इसलिए क्योंकि चेतन आनंद को मंत्री पद नहीं मिलने से उनके समर्थकों में नाराजगी की चर्चा पहले से ही चल रही थी। चेतन आनंद, जो नबीनगर से विधायक हैं, पहले राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े थे और बाद में जेडीयू में शामिल हुए थे।उनके पिता आनंद मोहन एक प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा रहे हैं और उनके पुराने विवादों के कारण भी यह परिवार लगातार सुर्खियों में रहा है। हाल के दिनों में आनंद मोहन द्वारा पार्टी नेतृत्व पर तीखे बयान दिए जाने से जेडीयू के भीतर असंतोष की स्थिति भी देखने को मिली है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस समिति में चेतन आनंद और अन्य प्रभावशाली विधायकों को शामिल करना एक तरह से सत्ता संतुलन और नाराजगी को कम करने की रणनीति हो सकती है। इससे उन नेताओं को भी संतुष्ट करने की कोशिश की गई है, जो मंत्री पद की दौड़ में थे लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला।हालांकि इस फैसले के बाद सियासी हलकों में बहस तेज हो गई है। एक तरफ इसे समावेशी राजनीतिक संतुलन का प्रयास बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे “संतुष्टि प्रबंधन” की रणनीति भी माना जा रहा है।फिलहाल बिहार की राजनीति में यह नया फेरबदल आने वाले दिनों में और कई समीकरण बदल सकता है, क्योंकि गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन लगातार चर्चा में बना हुआ है।

रिपोर्ट- रंजन कुमार सिंह