बांकीपुर उपचुनाव: भाजपा अपने इस नेता को बनाएगी उम्मीदवार, प्रशांत किशोर करेंगे बड़ा खेला
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन के विधायक पद से इस्तीफा देने के कारण यह सीट खाली हुई है, जिसके बाद यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। यह सीट बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बनी हुई है
Bankipur Bypoll : राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला बनता जा रहा है। यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भाजपा की प्रतिष्ठा और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की राजनीतिक साख की सीधी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन के विधायक पद से इस्तीफा देने के कारण यह सीट खाली हुई है, जिसके बाद यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को गिनती की तारीख चुनाव आयोग ने घोषित कर दी है।
भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई
बांकीपुर विधानसभा को पिछले चार दशक से भाजपा का अभेद्य गढ़ माना जाता है। पार्टी लगातार इस सीट पर जीत दर्ज करती रही है। राजधानी के इस शहरी क्षेत्र में शिक्षित मतदाता, व्यापारी वर्ग और मध्यवर्गीय आबादी का प्रभाव अधिक है। ऐसे में भाजपा किसी भी कीमत पर इस सीट को गंवाना नहीं चाहेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा यहां हारती है तो इसे संगठन और सरकार, दोनों के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। यही कारण है कि पार्टी उम्मीदवार चयन में सामाजिक समीकरणों के साथ-साथ संगठनात्मक मजबूती को भी प्राथमिकता दे रही है। बांकीपुर में कायस्थ समुदाय का प्रभाव काफी माना जाता है। इसके अलावा वैश्य, भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत, यादव, कुर्मी, अति पिछड़ा, दलित और मुस्लिम मतदाता भी चुनावी परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रशांत किशोर के लिए क्यों अहम है बांकीपुर?
दूसरी ओर, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर इस चुनाव को अपनी पार्टी के पुनरुत्थान का अवसर मान रहे हैं। वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद जन सुराज को राजनीतिक रूप से नई ऊर्जा देने की चुनौती उनके सामने है। प्रशांत किशोर पहले ही संकेत दे चुके हैं कि यदि पार्टी की कोर कमेटी सहमति देती है तो वह स्वयं बांकीपुर से चुनाव लड़ सकते हैं। उन्होंने इस चुनाव को सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के कामकाज पर जनमत संग्रह बताया है। जन सुराज की कोर कमेटी की बैठक 5 जुलाई को प्रस्तावित है, जिसमें उनके चुनाव लड़ने पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। यदि प्रशांत किशोर मैदान में उतरते हैं तो यह मुकाबला एक सामान्य उपचुनाव न रहकर बिहार की राजनीति का सबसे हाई-प्रोफाइल चुनाव बन जाएगा।
भाजपा में टिकट के कई दावेदार
भाजपा ने अभी तक अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन कई नाम चर्चा में हैं। सबसे मजबूत दावेदारों में नील रतन घोष का नाम प्रमुख माना जा रहा है। लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय घोष को नितिन नवीन का करीबी माना जाता है। दोनों परिवारों के बीच भी पुराने संबंध बताए जाते हैं। कायस्थ समुदाय से आने के कारण उन्हें सामाजिक समीकरणों का भी लाभ मिल सकता है। दूसरा प्रमुख नाम डॉ. अजय आलोक का है। पेशे से चिकित्सक अजय आलोक लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं। वह 2005 में लोक जनशक्ति पार्टी और 2010 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। बाद में जदयू और फिर भाजपा में शामिल हुए। टीवी बहसों में उनकी आक्रामक शैली और प्रभावी वक्तृत्व क्षमता उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।
तीसरा नाम आशीष सिन्हा का है। वह पूर्व विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण सिन्हा के पुत्र हैं। अरुण सिन्हा कई बार बांकीपुर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, हालांकि 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काट दिया था। अब चर्चा है कि पार्टी उनके परिवार को एक और मौका दे सकती है। इसके अलावा हाल ही में राजद छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं ऋतु जायसवाल का नाम भी चर्चा में है। यदि भाजपा महिला उम्मीदवार उतारने या वैश्य समाज को प्रतिनिधित्व देने का फैसला करती है तो उनकी दावेदारी मजबूत हो सकती है।
मुकाबले की तस्वीर
बांकीपुर के शहरी स्वरूप को देखते हुए राजनीतिक जानकार राष्ट्रीय जनता दल को यहां अपेक्षाकृत कमजोर मानते हैं। ऐसे में यदि प्रशांत किशोर स्वयं चुनाव मैदान में उतरते हैं तो मुख्य मुकाबला भाजपा और जन सुराज के बीच होने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच तेज प्रताप यादव की जनशक्ति जनता दल ने सामाजिक कार्यकर्ता मीना मानवी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है।
अब सभी की निगाहें 5 जुलाई पर टिकी हैं, जब जन सुराज प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी पर अंतिम फैसला ले सकता है। वहीं भाजपा भी जल्द अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकती है। 13 जुलाई नामांकन की अंतिम तिथि है, 30 जुलाई को मतदान होगा और 3 अगस्त को मतगणना के साथ परिणाम घोषित किए जाएंगे। दोनों प्रमुख दलों के उम्मीदवारों की घोषणा के बाद ही बांकीपुर की चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।