Bihar News: बिहार में कोर्ट का बड़ा फैसला, पूर्व विधायक सहित 21 लोगों को बड़ी राहत, इस मामले में हुए बा-इज्जत बरी

Bihar News: बिहार में कोर्ट ने अहम फैसला लेते हुए पूर्व विधायक सहित 21 लोगों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सभी को साक्ष्य के अभाव में बा-इज्जत बरी कर दिया है। जिसके बाद पूर्व विधायक ने कहा कि न्याय की जीत हुई है।

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कोर्ट का अहम फैसला - फोटो : social media

Bihar News: बिहार के भागलपुर में कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने शुक्रवार को पूर्व विधायक पवन यादव समेत कुल 21 लोगों को बड़ी राहत देते हुए सभी को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर बा-इज्जत बरी कर दिया। यह मामला लगभग एक दशक पूर्व कहलगांव अनुमंडल में एनटीपीसी द्वारा कराए जा रहे नाला निर्माण और उससे जुड़े विरोध-प्रदर्शन से संबंधित था।

क्या है पूरा मामला 

पूरा मामला कहलगांव एनटीपीसी थाना कांड संख्या 14/16 से जुड़ा है। एनटीपीसी के तत्कालीन जीएम टी. गोपाल कृष्णा की लिखित शिकायत पर पुलिस ने पूर्व विधायक पवन यादव समेत 21 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 7 अप्रैल को मजदाहा गांव में जल निकासी के लिए नाला निर्माण कार्य के दौरान लाठी-डंडों से लैस लोगों ने निर्माण कार्य को बाधित किया, गाली-गलौज की, नारेबाजी की और पांच लाख रुपये रंगदारी की मांग की।

8 धारों के तहत तय थे आरोप 

इस मामले में पुलिस ने आईपीसी की आठ धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। अनुसंधान के दौरान चार आरोपितों—गिरीश मंडल, सनातन मंडल, 70 वर्षीय सावित्री देवी और 90 वर्षीय तारा देवी—को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। बाद में सभी को जमानत मिली, हालांकि तारा देवी का इस दौरान निधन हो गया। वहीं शुक्रवार को मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद भागलपुर के एसीजेएम-1 की अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप सिद्ध नहीं कर पाने के आधार पर सभी आरोपितों को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

क्या बोले पूर्व विधायक 

कोर्ट से बरी होने के बाद पूर्व विधायक पवन यादव ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा था और अंततः न्याय मिला। उन्होंने कहा कि दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन निर्दोष लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भेजना न्यायोचित नहीं है। उन्होंने एनटीपीसी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राख के प्रदूषण से आसपास के गांवों में गंभीर बीमारियां फैल रही हैं, जिससे महिलाओं और गर्भस्थ शिशुओं तक पर खतरा बना हुआ है। उन्होंने सरकार से इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की मांग की।

झुठे मुकदमे में फंसाने का आरोप 

वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता हिमांशु शेखर ने कहा कि उनके मुवक्किलों को साजिश के तहत झूठे मुकदमे में फंसाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि एनटीपीसी द्वारा गलत तरीके से नाला निर्माण कराया जा रहा था, जिसे गांव के लिए विनाशकारी बताते हुए आंदोलन के रूप में रोका गया था। इसके बावजूद पुलिस ने गलत अनुसंधान कर सभी को अभियुक्त बना दिया। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले से न्याय की जीत हुई है।

भागलपुर से बालमुकुंद की रिपोर्ट