भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: आरोपी डीएसपी को मिली नई पोस्टिंग, परिजनों ने उठाए सवाल
बिहार के चर्चित भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में एक और बड़ा मोड़। मामले के आरोपी डीएसपी को नई जगह पोस्टिंग दे दी गई है। एक तरफ जहां मामले की न्यायिक जांच जारी है, वहीं इस प्रशासनिक फैसले पर परिजनों और विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर चौतरफा घिरी सम्राट सरकार ने आज (बुधवार, 1 जुलाई) एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। सरकार की ओर से जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, राज्य में तैनात 53 DSP रैंक के अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। गृह विभाग ने ट्रांसफर को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। साथ ही अधिकारियों को जल्द ही अपने नए पदस्थापन पर योगदान देने का आदेश दिया है। प्रशासनिक हलकों में इसे कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इस पूरी लिस्ट में सबसे ज्यादा ध्यान चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले से जुड़े एक अहम अधिकारी के तबादले ने खींचा है। विदित हो कि भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को भरत भूषण तिवारी कथित मुठभेड़ प्रकरण के बाद पुलिस मुख्यालय ने बीते 23 जून को बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया और प्राथमिकी में आरोपित जगदीशपुर डीएसपी राजेश कुमार शर्मा को तत्काल प्रभाव से मुख्यालय क्लोज कर दिया गया। लेकिन एनकाउंटर में आरोपी एसडीपीओ को 7 दिन बाद नई पोस्टिंग मिल गई है।

आरोपी डीएसपी राजेश शर्मा को मिली 'मलाईदार' पोस्टिंग
भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले के मुख्य आरोपी डीएसपी राजेश शर्मा को सरकार ने इस फेरबदल के तहत नई और बेहद अहम जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (Prohibition & Narcotics Control Bureau) का नया जिम्मा दिया गया है। सरकार के इस फैसले ने प्रशासनिक और राजनीतिक जानकारों को चौंका दिया है। जानकारों का स्पष्ट कहना है कि आरोपों के घेरे में होने के बावजूद डीएसपी को दी गई यह जिम्मेदारी कोई 'पनिशमेंट पोस्टिंग' नहीं है, बल्कि इसे महकमे में एक बेहद 'मलाईदार पोस्ट' माना जाता है।

पीड़ित परिवार की मांग अनसुनी, सरकार पर 'चिढ़ाने' का आरोप
एक तरफ जहां हत्या के आरोपी डीएसपी को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है, वहीं दूसरी तरफ मृतक भरत तिवारी का परिवार इस फैसले से बेहद आहत है। पीड़ित परिवार लगातार स्थानीय एसपी पर संगीन आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहा है। परिवार का कहना है कि वर्तमान एसपी के रहते मामले की निष्पक्ष जांच मुमकिन नहीं है। गंभीर आरोपों के बाद भी एसपी का ट्रांसफर न करना और अब आरोपी डीएसपी को इतनी रसूखदार पोस्टिंग देना, पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने और उन्हें चिढ़ाने जैसा है।
प्रचंड बहुमत और कमजोर विपक्ष का दिखा असर
इस पूरे घटनाक्रम पर आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार की इस बेफिक्री के पीछे सदन का गणित है। वर्तमान में सम्राट सरकार के पास 202 विधायकों का एक प्रचंड और सुरक्षित बहुमत है, जबकि सामने खड़ा विपक्ष बेहद कमजोर स्थिति में है। लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि मजबूत विपक्ष और जनता के दबाव की परवाह न करते हुए, सरकार इसी भारी बहुमत के अहंकार में ऐसे विवादित फैसले ले रही है, जिससे न्याय की उम्मीद धुंधली होती दिख रही है।