भरत तिवारी एनकाउंटर पूरी तरह 'फेक', दोषी पुलिसकर्मियों को निहत्था कर भेजें जेल: अश्विनी चौबे

पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे ने भोजपुर के शाहपुर (बिलौटी) में हुई भरत तिवारी एनकाउंटर को पूरी तरह से 'फेक' करार देते हुए दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत जेल भेजने की मांग की है। वहीं उन्होंने इस मामले को लेकर विपक्ष पर तीखा निशाना साधा है

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पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे ने भरत तिवारी एनकाउंटर को बताया पूरी तरह फेक- फोटो : नरोत्तम कुमार

Patna : भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई पुलिस मुठभेड़ को लेकर सूबे की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने इस मामले को लेकर पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए है। उन्होंने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह एनकाउंटर पूरी तरह से 'फेक' (फर्जी) है। पुलिस चाहती तो भरत तिवारी को दबोच कर गिरफ्तार कर सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। चौबे ने कड़े तेवर अपनाते हुए मांग की कि जिस भी पुलिसकर्मी ने इस कृत्य को अंजाम दिया है, उसका हथियार तुरंत जब्त कर उसे सीधे जेल की सलाखों के पीछे डालना चाहिए।


"भरत तिवारी अपराधी नहीं, सामाजिक कार्यकर्ता थे; उनके मुद्दे की भी हो जांच"

अश्विनी चौबे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मृतक भरत तिवारी कोई अपराधी नहीं थे, बल्कि वे एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में समाज से सीधे जुड़े हुए थे। वे इलाके में लोगों को मिल रहे गंदे पानी के खिलाफ और जनहित की लड़ाई लड़ रहे थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मांग की कि जिस मुद्दे को लेकर भरत तिवारी संघर्ष कर रहे थे, उस मामले की भी गहराई से जांच होनी चाहिए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "भरत तिवारी का खून व्यर्थ नहीं जाएगा, जिस जनहित के मुद्दे पर वे लड़ाई लड़ रहे थे, अब उस लड़ाई को मैं खुद आगे बढ़ाऊंगा।" इसके साथ ही उन्होंने सरकार से मांग की कि चूंकि बारिश का समय है, इसलिए पीड़ित परिवार को तुरंत टेंट व अन्य आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए।


"गरीब ब्राह्मण था, इसलिए गायब हैं विपक्ष के बड़े नेता"; मांझी के बयान को बताया गलत

पीड़ित परिवार से मुलाकात और बातचीत का हवाला देते हुए अश्विनी चौबे ने विपक्षी दलों और अन्य बड़े नेताओं पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि आखिर विपक्ष के बड़े नेता अब तक पीड़ित परिजनों से मिलने क्यों नहीं पहुंचे और कहां गायब हैं? चौबे ने आरोप लगाया कि भरत तिवारी एक 'गरीब ब्राह्मण' थे, शायद इसीलिए कोई बड़ा नेता उनके घर सांत्वना देने नहीं जा रहा है। उन्होंने कहा कि चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी नेताओं को भरत तिवारी के घर जाना चाहिए। वहीं, इस मामले पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी द्वारा दिए गए बयान पर असहमति जताते हुए चौबे ने कहा कि मांझी जी का बयान सही नहीं है, वे उस समय दिल्ली में थे इसलिए शायद उन्हें जमीनी हकीकत और घटना की पूरी जानकारी नहीं होगी।


सरकार की नीयत साफ, दोषी पुलिसकर्मी हुए सस्पेंड; घटना को दबाया नहीं जाएगा

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सम्राट सरकार के रुख की सराहना करते हुए कहा कि हमारी सरकार अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पर काम करती है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने की घोषणा कर दी है, जिससे साफ है कि इस घटना को दबाया नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया पुलिसकर्मी दोषी हैं, इसी वजह से उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस न्यायिक जांच का फलाफल (नतीजा) जल्द से जल्द सामने लाया जाए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।


अपराध के खिलाफ जारी रहेगी जंग, 26 जून को 'आपातकाल' के विरोध में मौन उपवास पर बैठेंगे 

अश्विनी चौबे ने दोहराया कि वे अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा मजबूती से लड़ते रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अपने आगामी राजनीतिक कार्यक्रम की घोषणा करते हुए बताया कि वे आगामी 26 जून को एक दिवसीय 'मौन उपवास' पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि यह उपवास देशवासियों को आपातकाल (इमरजेंसी) के उस काले दौर की याद दिलाने के लिए होगा। चौबे ने कहा कि आपातकाल का वह क्रूर और काला वर्ष भारतवर्ष कभी नहीं भूल सकता, और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए वे प्रतिबद्ध हैं।

नरोत्तम की रिपोर्ट