Bihar Bridges collapsed: बिहार में पुलों का ‘भ्रष्टाचार मॉडल’? 5 साल में गिरे 26 ब्रिज, एक 3 बार ढहा, विक्रमशिला सेतु ने पहले ही दिए थे संकेत
Bihar Bridges collapsed: बिहार में पिछले पांच साल में करीब 26 पुल गिर चुके हैं। इस बीच विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद निर्माण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
Bihar Bridges collapsed: बिहार में पुल गिरने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब यह सिर्फ हादसों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि निर्माण व्यवस्था और निगरानी सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। राज्य में कभी निर्माणाधीन पुल गिर जाता है तो कहीं कई साल पुराने पुल अचानक टूटकर ढह जाते हैं।
हाल ही में भागलपुर को उत्तर बिहार से जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा गिर गया। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों के अनुसार बिहार में करीब 26 पुल गिर चुके हैं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें कई पुल ऐसे भी थे जिनका निर्माण हाल के वर्षों में ही हुआ था।
विक्रमशिला सेतु की खराब स्थिति को लेकर चेतावनी
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक विक्रमशिला सेतु की खराब स्थिति को लेकर अगस्त 2024 से अप्रैल 2026 के बीच कई बार अधिकारियों को चेतावनी दी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि ओवरलोड ट्रकों की लगातार आवाजाही और पुल के बेयरिंग कमजोर होने से इसकी संरचना पर असर पड़ रहा था। अगस्त 2024 में सड़क निर्माण विभाग के निरीक्षण में पुल के कई एक्सपेंशन जॉइंट्स में गैप पाए गए थे। इसके बाद जनवरी 2025 में फिर इसकी जानकारी मुख्यालय को भेजी गई। मार्च 2025 में भागलपुर के जिलाधिकारी ने भी पुल में बढ़ती दरारों को लेकर अधिकारियों को चेतावनी दी थी।
IIT पटना और BRPNN की टीम कर रही जांच
हालांकि उसी महीने IIT पटना और BRPNN की टीम ने जांच के बाद पुल को सुरक्षित बताया था। लेकिन बाद में पुल का हिस्सा गिर गया। विक्रमशिला सेतु ने इससे पहले भी खतरे के संकेत दिए थे। मार्च 2026 में पुल की सुरक्षा दीवार का हिस्सा टूटकर गिर गया था। उस समय इंजीनियरों ने कहा था कि मुख्य संरचना सुरक्षित है। लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद पुल का हिस्सा ढह गया। राहत की बात यह रही कि समय रहते पुल पर यातायात रोक दिया गया था, जिससे कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। फिलहाल सरकार का कहना है कि करीब तीन महीनों में पुल पर दोबारा आवाजाही शुरू कराई जा सकती है।
निर्माण के दौरान तीन बार गिरा
सबसे ज्यादा चर्चा अगुवानी-सुल्तानगंज पुल की हुई, जो निर्माण के दौरान तीन बार गिर चुका है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस पुल के बार-बार गिरने पर विपक्ष ने सरकार को घेरा था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पुल गिरने के पीछे कई कारण हैं। इनमें खराब डिजाइन, घटिया निर्माण सामग्री, समय पर जांच नहीं होना और निगरानी में लापरवाही शामिल हैं। जून और जुलाई 2024 में बिहार में 17 दिनों के अंदर 12 से ज्यादा पुल और पुलिया गिर गए थे। इनमें अररिया, सीवान, पूर्वी चंपारण, किशनगंज, सारण और मधुबनी जैसे जिले शामिल थे। 3 जुलाई 2024 को एक ही दिन में सीवान और सारण में पांच पुल गिर गए थे। वहीं 18 जून 2024 को अररिया जिले के सिकटी प्रखंड में परमान नदी पर निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिर गया था। अगस्त 2024 में अगुवानी-सुल्तानगंज पुल फिर चर्चा में आया। इससे पहले 2022 और 2023 में भी यह पुल गिर चुका था। 2023 में भी कई बड़े हादसे हुए थे। 15 मई 2023 को पूर्णिया-कटिहार इलाके में ढलाई के दौरान बॉक्स ब्रिज गिर गया था। वहीं 19 फरवरी 2023 को पटना जिले में बिहटा-सरमेरा फोर लेन पुल का हिस्सा ढह गया था।