Bihar Assistant Professor: बिहार में प्रोफेसर बनने का बदला नियम! लिखित परीक्षा से Teaching Demo तक जानें सबकुछ
Bihar Assistant Professor: बिहार में Assistant Professor Recruitment 2026 को लेकर बड़ी सहमति बनी है। 43 से 55 साल उम्र सीमा, लिखित परीक्षा, एपीआइ, टीचिंग डेमो और पीएचडी अंकों समेत भर्ती नियमों में बदलाव के प्रस्ताव जानें।
Bihar Assistant Professor: बिहार में सहायक प्राध्यापक भर्ती नियमावली-2026 में बदलाव की मांग को लेकर गर्दनीबाग में 21 दिनों से चल रहा शोध छात्रों का अनशन अब खत्म होने की दिशा में है। सोमवार देर रात राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) के साथ करीब दो घंटे हुई बैठक में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। वार्ता के बाद शोध छात्रों ने अनशन वापस लेने का आश्वासन दिया। हालांकि, कई प्रस्तावों पर अंतिम फैसला समिति और सरकार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
43 साल की जगह 55 साल उम्र सीमा का प्रस्ताव
सहायक प्राध्यापक भर्ती के लिए मौजूदा अधिकतम उम्र सीमा 43 वर्ष है। वार्ता में इसे बढ़ाकर 55 वर्ष करने के प्रस्ताव पर सहमति बनी है। नियमित बहाली शुरू होने के बाद उम्र सीमा को धीरे-धीरे कम करने पर भी विचार किया जाएगा। मांगों पर आगे फैसला लेने के लिए राज्यपाल मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद 15 दिनों के अंदर एक समिति गठित करेंगे। इस समिति में शिक्षाविदों के साथ शिक्षा क्षेत्र में काम करने का अनुभव रखने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को भी शामिल किया जा सकता है।
नियमावली में बदलाव होने तक भर्ती पर रोक
सहायक प्राध्यापक भर्ती परिनियम-2026 में जरूरी बदलाव किए जाने तक इसके आधार पर नियमित या संविदा सहायक प्राध्यापकों की भर्ती नहीं करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका मतलब है कि नियमावली में संशोधन होने तक 2026 के भर्ती नियमों को रोकने पर विचार किया गया है।
लिखित परीक्षा में ऑब्जेक्टिव सवालों का प्रस्ताव
सहायक प्राध्यापक भर्ती में लिखित परीक्षा कराने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इस परीक्षा को वस्तुनिष्ठ यानी ऑब्जेक्टिव रखने की बात कही गई है।
लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों के एपीआइ यानी Academic Performance Indicator स्कोर की गणना की जाएगी। लिखित परीक्षा और एपीआइ के अंकों को मिलाकर मेरिट लिस्ट तैयार करने का प्रस्ताव है। इसके बाद तय संख्या में उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जा सकता है।
इंटरव्यू में टीचिंग डेमो भी होगा
भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों की पढ़ाने की क्षमता जांचने के लिए इंटरव्यू में टीचिंग डेमो शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इससे केवल विषय की जानकारी ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार किस तरह छात्रों को पढ़ा सकता है, इसका भी आकलन किया जा सकेगा।
पीएचडी के लिए 30 अंक का प्रस्ताव
एपीआइ स्कोर को लेकर भी कई बदलावों की मांग रखी गई है। मैट्रिक और इंटरमीडिएट के अंकों को एपीआइ में शामिल नहीं करने की मांग पर विचार किया जाएगा। वहीं, नेट और जेआरएफ के लिए अधिकतम 11 अंक तक और पीएचडी के लिए कम से कम 30 अंक रखने की मांग की गई है। शोध प्रकाशन और शिक्षण अनुभव को भी एपीआइ में शामिल करने पर विचार होगा।
शोध प्रकाशन और अनुभव के नियम होंगे साफ
शोध प्रकाशन और शिक्षण अनुभव के अंकों को लेकर स्पष्ट नियम बनाने की बात भी हुई है। इसका उद्देश्य यह है कि गलत या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किसी उम्मीदवार को अनुचित फायदा न मिले।
अतिथि सहायक प्राध्यापकों के लिए भी बड़ी मांग
अतिथि सहायक प्राध्यापकों की मांगों पर भी समिति विचार करेगी। इनमें संविदा सहायक प्राध्यापकों की तरह न्यूनतम वेतनमान और उस पर महंगाई भत्ता देने की मांग शामिल है। सभी विश्वविद्यालयों में नवीकरण की प्रक्रिया एक जैसी करने की मांग भी रखी गई है। इसके अलावा शैक्षणिक प्रमाणपत्र, शोध पत्र और अनुभव की जांच के बाद अतिथि सहायक प्राध्यापकों को 65 वर्ष की उम्र तक काम करने का अवसर देने की मांग पर भी विचार होगा।
हर साल खाली पदों पर भर्ती का सुझाव
बैठक में यह सुझाव भी सामने आया कि उम्र सीमा को अचानक कम करने के बजाय इसे चरणबद्ध तरीके से घटाया जाए। इस दौरान हर साल खाली पदों के आधार पर सहायक प्राध्यापकों की नियमित भर्ती की जाए। अब इन सभी प्रस्तावों पर गठित होने वाली समिति विचार करेगी। इसके बाद सरकार की ओर से नियमावली में बदलाव को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।