छपरा घटना के बाद बिहार के BDO का सरकार के खिलाफ मोर्चा, काली पट्टी बांधकर कर रहे विरोध।
बिहार में बीडीओ काली पट्टी बांधकर सरकारी काम कर रहे हैं। यह विरोध तब तक जारी रखने की बात कही गई है, जब तक सरकार सुरक्षा व्यवस्था पर ठोस निर्णय नहीं लेती।
पटना: NEET आंदोलन के दौरान बिहार में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना रहा। अब उसी व्यवस्था को संभालने वाले प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) खुद अपनी सुरक्षा को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। छपरा में विधि-व्यवस्था ड्यूटी के दौरान छपरा सदर के BDO दृष्टि पाठक और रिवीलगंज के BDO रितेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों का इलाज पटना स्थित IGIMS में चल रहा है। इस घटना ने पूरे बिहार के प्रशासनिक महकमे में नाराजगी और चिंता बढ़ा दी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भीड़ को नियंत्रित करने और प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों के साथ पर्याप्त सुरक्षा कर्मी ही नहीं होंगे, तो वे कानून-व्यवस्था संभालेंगे या अपनी जान बचाएंगे? क्या सरकार अपने ही अधिकारियों को बिना सुरक्षा कवच के संवेदनशील ड्यूटी पर भेजती रहेगी?
इन्हीं सवालों के बीच बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ (BRDSA) ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 27 जुलाई से राज्यभर के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी काली पट्टी बांधकर नियमित सरकारी कार्य कर रहे हैं। संघ का कहना है कि यह विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार सुरक्षा को लेकर ठोस निर्णय नहीं लेती।
दृष्टि पाठक और रितेश कुमार के घायल होने के बाद बढ़ा आक्रोश
संघ का कहना है कि छपरा की घटना कोई सामान्य घटना नहीं है। विधि-व्यवस्था ड्यूटी के दौरान दो बीडीओ का गंभीर रूप से घायल होना इस बात का संकेत है कि संवेदनशील अभियानों में अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। संगठन ने कहा कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।हर BDO के साथ दो प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी की मांग बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ ने मुख्य सचिव को सौंपे ज्ञापन में मांग की है कि प्रत्येक प्रखंड विकास पदाधिकारी के साथ कम-से-कम दो प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की स्थायी प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित की जाए। संघ का कहना है कि विधि-व्यवस्था, अतिक्रमण हटाने, चुनाव, प्रदर्शन और अन्य संवेदनशील अभियानों के दौरान बीडीओ सीधे भीड़ के बीच होते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराना जरूरी है।संघ
ने प्रत्येक प्रखंड कार्यालय में बॉडी प्रोटेक्टर, हेलमेट, शील्ड, लेग गार्ड और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके साथ ही ड्यूटी के दौरान घायल अधिकारियों का निशुल्क इलाज, विशेष बीमा, क्षतिपूर्ति नीति और संवेदनशील ड्यूटी के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने की भी मांग की गई है।संघ ने छपरा की घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सिर्फ जांच नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी जरूरी है। सरकार की योजनाओं को धरातल पर लागू करने वाले अधिकारी आज अपनी सुरक्षा के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं। छपरा सदर के BDO दृष्टि पाठक और रिवीलगंज के BDO रितेश कुमार का IGIMS में इलाज इस बात की याद दिलाता है कि संवेदनशील ड्यूटी के दौरान सुरक्षा में चूक कितनी भारी पड़ सकती है।
अब सवाल सरकार से है—क्या हर संवेदनशील ड्यूटी पर बीडीओ के साथ प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी तैनात किए जाएंगे? फिलहाल पूरे बिहार के बीडीओ काली पट्टी बांधकर एक ही संदेश दे रहे हैं—"सुरक्षित अधिकारी ही सुरक्षित प्रशासन की गारंटी हैं।"