गांवों पर टैक्स के तूफान से सियासी बवाल, सरकार बैकफुट पर, सम्राट चौधरी बोले- गरीबों से नहीं लिया जाएगा कर

Bihar Government: बिहार में पंचायत स्तर पर नए टैक्स नियम को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है।

Bihar CM Clarifies No Tax on Poor Amid Village Tax Row
गरीबों से नहीं लिया जाएगा कर- फोटो : social Media

Bihar Government: बिहार में पंचायत स्तर पर नए टैक्स नियम को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। गांवों में घर, दुकान और अन्य प्रतिष्ठानों पर टैक्स लगाने के फैसले के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला, जिसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को विधान परिषद में सफाई देनी पड़ी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा गरीबों पर टैक्स लगाने की नहीं है और गरीब परिवारों से किसी तरह का कर नहीं वसूला जाएगा।

मुख्यमंत्री ने राजद के एमएलसी सुनील कुमार सिंह के सवाल का जवाब देते हुए कहा, "सरकार की ऐसी कोई मंशा नहीं है। गरीबों पर टैक्स लगाने का कोई प्रावधान नहीं है। गांव के अंदर जो होर्डिंग लगेंगे, उस पर चर्चा है।" उन्होंने कहा कि बिहार में पहले से ही कचरा प्रबंधन और नल-जल योजना के लिए 30-30 रुपये शुल्क लिया जा रहा है और समय के अनुसार नियमों में बदलाव किए जाएंगे।

दरअसल, बिहार सरकार ने गांवों की पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और स्थानीय स्तर पर आय बढ़ाने के उद्देश्य से ‘बिहार ग्राम पंचायत (कर, दर एवं शुल्क) नियमावली-2026’ को मंजूरी दी थी। इसके तहत पंचायत क्षेत्रों में कई तरह के टैक्स और शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है।नई नियमावली के अनुसार पंचायत क्षेत्रों में होल्डिंग टैक्स लगाया जाएगा। आवासीय मकान, दुकान, गोदाम, व्यावसायिक भवन और अन्य स्थायी संपत्तियों पर सालाना टैक्स लिया जा सकता है। इसके अलावा हाट, बाजार और मेले में व्यापार करने वालों से भी शुल्क वसूला जाएगा।

पंचायतों को जलापूर्ति और स्वच्छता सेवा के लिए भी शुल्क लेने का अधिकार दिया गया है। इसके तहत हर घर नल का जल और कचरा प्रबंधन जैसी सेवाओं के लिए राशि ली जाएगी।इसके अलावा गांवों में चलने वाले लघु उद्योग, चावल मिल, तेल मिल, आटा चक्की, गैर कृषि उद्योग, ईंट भट्ठा, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, मैरिज हॉल और विज्ञापन होर्डिंग लगाने वालों पर भी शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है।

नियमावली में धार्मिक स्थलों जैसे मंदिर, मस्जिद और मठ से शुल्क लेने का भी प्रावधान शामिल है, जिसको लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे ग्रामीण जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है।राजद नेता सुनील कुमार सिंह ने विधान परिषद में सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि आमदनी बढ़ाने के नाम पर ग्रामीण इलाकों में 5 हजार रुपये तक होल्डिंग टैक्स लगाया जा रहा है। उन्होंने इसे अंग्रेजों के जमाने की व्यवस्था बताते हुए विरोध जताया।

यह पहला मौका नहीं है जब सरकार को अपने फैसले पर सफाई देनी पड़ी है। इससे पहले स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स वसूली को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था। बिहार सरकार ने नई टोल नीति जारी की थी, जिसके बाद लोगों में यह संदेश गया कि निजी वाहनों पर भी टोल लगेगा।इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया था कि स्टेट हाईवे पर केवल व्यावसायिक वाहनों से टोल लिया जाएगा, निजी वाहनों को इससे बाहर रखा जाएगा।

अब पंचायत टैक्स के मुद्दे पर सरकार के स्पष्टीकरण के बाद भी विपक्ष हमलावर है। वहीं सरकार का दावा है कि नए नियमों का उद्देश्य पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाना है, न कि गरीबों पर आर्थिक बोझ डालना। बिहार में पंचायत टैक्स का यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।