Bihar Investment: ऊर्जा क्रांति की ओर बिहार, कोयला गैसीकरण परियोजना से 12000 करोड़ निवेश, रोजगार और औद्योगिक बदलाव की नई इबारत लिखने लगा राज्य

Bihar Investment: बिहार अब ऊर्जा और औद्योगिक विकास के एक नए मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है, जहां कोयला गैसीकरण आधारित परियोजनाएं राज्य की आर्थिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखती हैं।...

Bihar coal gasification push draws 12000 crore investment jo
रोजगार और औद्योगिक बदलाव की नई इबारत लिखने लगा राज्य- फोटो : social Media

Bihar Investment:  बिहार अब ऊर्जा और औद्योगिक विकास के एक नए मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है, जहां कोयला गैसीकरण आधारित परियोजनाएं राज्य की आर्थिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखती हैं। केंद्र सरकार के आकलन के अनुसार इस सेक्टर में बिहार में लगभग 8000 से 12000 करोड़ रुपये तक के निवेश की प्रबल संभावना है, जो आने वाले वर्षों में राज्य की औद्योगिक संरचना को नई दिशा दे सकता है।

इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर हाल ही में केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दूबे ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर विस्तृत विचार-विमर्श किया। बैठक में परियोजना के क्रियान्वयन, निवेश संभावनाओं और रोजगार सृजन पर गहन चर्चा हुई।

सरकारी आकलन के मुताबिक इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 2500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक प्रभाव इससे कहीं अधिक व्यापक हो सकता है, क्योंकि यह तकनीक ऊर्जा, रसायन और उर्वरक उत्पादन जैसे कई क्षेत्रों को एक साथ प्रभावित करती है।कोयला गैसीकरण तकनीक का उद्देश्य कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे सिंथेटिक गैस (सिंगैस) में बदलना है, जिसमें मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन शामिल होते हैं। इस गैस का उपयोग मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया, हाइड्रोजन और तरल ईंधन जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।

भारत में वर्ष 2025 के दौरान मेथनॉल, अमोनिया और अन्य रासायनिक उत्पादों के आयात पर लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए, जो देश की आर्थिक निर्भरता को दर्शाता है। ऐसे में कोयला गैसीकरण को आयात प्रतिस्थापन की दिशा में एक रणनीतिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी क्षमता भविष्य में 3 लाख करोड़ रुपये तक के आयात को कम करने की बताई जा रही है।इसी दृष्टि से केंद्र सरकार ने 2021 में राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन की शुरुआत की थी, जिसका लक्ष्य 2030 तक प्रतिवर्ष 10 करोड़ टन कोयले का गैसीकरण करना है। इसके तहत कई पायलट परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं, जिनमें झारखंड में स्थापित देश की पहली भूमिगत गैसीकरण परियोजना भी शामिल है।

हालांकि विशेषज्ञ इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि यह तकनीक पूंजी-गहन है और इसमें जोखिम भी अधिक है। संयंत्रों की स्थापना में 10 से 15 वर्ष तक का समय लग सकता है। साथ ही नीतिगत समर्थन और निजी क्षेत्र की भागीदारी इसकी सफलता के लिए बेहद आवश्यक मानी जा रही है।पारदर्शिता और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी कर सभी हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। उद्योग जगत की भागीदारी बढ़ाने के लिए हाल ही में मुंबई में तीसरा रोड शो भी आयोजित किया गया।यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो बिहार न केवल ऊर्जा और रसायन उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा, बल्कि यह राज्य को एक उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में भी स्थापित कर सकता है