Commercial LPG Cylinder: सरकार की सख्ती का असर! बिहार में घटी कमर्शियल गैस सिलिंडर की खपत, होटलों ने बदला तरीका
Commercial LPG Cylinder: बिहार में कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमत 2,010 रुपये से बढ़कर 3,421 रुपये पहुंच गई है। बढ़ती लागत के कारण होटल, रेस्तरां और मिठाई कारोबार प्रभावित हुए हैं, जबकि गैस खपत में 35 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है।
Commercial LPG Cylinder: व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब होटल, रेस्तरां, मिठाई दुकानों और अन्य खाद्य कारोबारों पर साफ दिखाई देने लगा है। पिछले कुछ महीनों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमत में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे कारोबारियों की लागत बढ़ गई है और गैस की खपत में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
फरवरी महीने में 19 किलोग्राम का व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर करीब 2,010 रुपये में मिल रहा था, जो अब बढ़कर 3,421 रुपये तक पहुंच गया है। यानी कुछ ही महीनों में इसकी कीमत में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बढ़ती कीमतों का सीधा असर व्यवसायों की संचालन लागत पर पड़ा है।
इंडियन ऑयल के आंकड़ें
इंडियन ऑयल के आंकड़ों के अनुसार, पटना में फरवरी के दौरान हर महीने करीब 32,305 व्यावसायिक सिलिंडरों की खपत होती थी, जो अब घटकर 23,742 सिलिंडर रह गई है। यह लगभग 26.5 प्रतिशत की गिरावट है। वहीं पूरे बिहार में व्यावसायिक गैस की खपत 68,729 सिलिंडर से घटकर 44,596 सिलिंडर रह गई है, जो करीब 35 प्रतिशत की कमी को दर्शाती है। राजधानी पटना के कई होटल और रेस्तरां संचालकों का कहना है कि गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण अब उन्हें वैकल्पिक ईंधन की ओर रुख करना पड़ रहा है। राजीव नगर स्थित रामप्रीत फैमिली रेस्तरां के संचालक ने बताया कि पहले उनके यहां हर महीने 20 से 30 गैस सिलिंडर खर्च होते थे, लेकिन अब उन्होंने कोयले की भट्ठी का उपयोग बढ़ा दिया है और महीने में केवल दो सिलिंडर ही इस्तेमाल हो रहे हैं।
कोयला और इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल बढ़ा
वेलफूड रेस्टोरेंट के संचालक पंकज कुमार का कहना है कि गैस की बढ़ती लागत के कारण अब कोयला और इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल ग्राहकों पर सीधा बोझ नहीं डाला गया है, लेकिन मिलने वाली छूट कम कर दी गई है। दिल्ली दरबार बिरयानी के संचालक के अनुसार, उनके यहां ग्राहकों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत की कमी आई है। बिरयानी बनाने की विशेष प्रक्रिया के कारण वे पूरी तरह कोयले पर नहीं जा सकते, इसलिए उन्हें अभी भी हर महीने 12 से 15 गैस सिलिंडर की जरूरत पड़ती है।
गैस की वजह से ग्राहकों की संख्या में भी कमी
संतोष सिलाव खाजा भंडार के संचालक ने बताया कि पहले उनके यहां हर महीने लगभग 30 सिलिंडर की खपत होती थी, जो अब घटकर 20 सिलिंडर रह गई है। उन्होंने कहा कि ग्राहकों की संख्या में भी कमी देखी जा रही है। वहीं स्वाद रेस्तरां एंड कैफे के संचालक ने बताया कि बढ़ती गैस लागत को देखते हुए मेन्यू की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने पर विचार किया जा रहा है। दूसरी ओर, श्री बालाजी टी स्टाल भोजनालय और सागर स्वीट्स एंड नमकीन जैसे कई प्रतिष्ठानों ने भी खर्च कम करने के लिए कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन का उपयोग बढ़ा दिया है।