भरत तिवारी एनकाउंटर पर राजनीति करने वालों पर बरसे संजय झा, तेजस्वी को दे दी बड़ी नसीहत

तेजस्वी यादव द्वारा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से माफी मांगने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय झा ने कहा कि सम्राट चौधरी पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुशासन और कानून के राज की नीति पर काम कर रहे हैं।

Sanjay Jha on Bharat Tiwari encounter
Sanjay Jha on Bharat Tiwari encounter- फोटो : news4nation

Bharat Tiwari encounter : भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है और अब सभी पक्षों को जांच रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। संजय झा ने कहा कि भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में जांच आयोग के गठन को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने इसे स्वागतयोग्य फैसला बताते हुए कहा कि घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले का संज्ञान लिया था और न्यायिक जांच कराने की घोषणा की थी। अब सरकार अपने वादे के अनुरूप कार्रवाई कर रही है।


उन्होंने कहा, "सरकार ने अच्छा काम किया है। जो भी तथ्य हैं, वे जांच के दौरान सामने आएंगे। ऐसे में इस मुद्दे पर अनावश्यक राजनीति करने के बजाय सभी को जांच प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना चाहिए।" तेजस्वी यादव द्वारा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से माफी मांगने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय झा ने कहा कि सम्राट चौधरी पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुशासन और कानून के राज की नीति पर काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और सरकार का स्पष्ट सिद्धांत है कि अपराधी को छोड़ा नहीं जाएगा, जबकि किसी निर्दोष को फंसाया भी नहीं जाएगा।


क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर मामला?

भरत तिवारी को उसके समर्थक सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं। पुलिस के अनुसार, हाल ही में हुई मुठभेड़ के दौरान भरत तिवारी के पास अवैध हथियार था और उसने पुलिस कार्रवाई के दौरान हथियार का इस्तेमाल किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने इस घटना को आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताया है। हालांकि, घटना के बाद सामने आए कुछ वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के दावों ने मामले को विवादों में ला दिया। आरोप लगाया जा रहा है कि भरत तिवारी ने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मारी। इन्हीं आरोपों के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी है। इस संबंध में कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई है।


न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू

एनकाउंटर के बाद भरत तिवारी के परिजनों और समर्थकों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए न्याय की मांग की। विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सत्तापक्ष ने जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की अपील की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित करने का फैसला किया है। अब सभी की निगाहें जांच आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।


इस बीच भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है। विपक्ष जहां इसे जातीय और सामाजिक न्याय के मुद्दे से जोड़कर सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।