Patna News: बैंक की मनमानी पड़ी भारी, बिना सूचना खाता बंद करना पड़ा महंगा, उपभोक्ता आयोग ने इतना लाख रुपया देने का सुनाया आदेश
Patna News: बैंकों की मनमानी पर बिहार राज्य उपभोक्ता आयोग ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। ...
Patna News: बैंकों की मनमानी पर बिहार राज्य उपभोक्ता आयोग ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने एक राष्ट्रीयकृत बैंक की गांधी मैदान शाखा को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए खाताधारक के पक्ष में फैसला दिया है। आयोग ने बैंक को 1लाख 03 हजार रुपये की मूल राशि, मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में 25 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने वर्ष 2002 में बैंक की गांधी मैदान शाखा में अपना वेतन खाता खुलवाया था। बाद में बैंकिंग प्रक्रिया के तहत यह खाता दानापुर शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्ष 2014 में शिकायतकर्ता ने अपनी एलआईसी की परिपक्वता (मैच्योरिटी) राशि 1.03 लाख रुपये इसी खाते में जमा कराई। लेकिन जब उन्होंने खाते से राशि निकालने का प्रयास किया तो बैंक ने यह कहते हुए भुगतान से इनकार कर दिया कि उनका खाता इनऑपरेटिव हो चुका है। बैंक ने खाते के निष्क्रिय होने का हवाला देकर निकासी पर रोक लगा दी, जिससे खाताधारक को आर्थिक परेशानी के साथ-साथ मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ा।
मामला बिहार राज्य उपभोक्ता आयोग पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान बैंक अपने दावों को साबित नहीं कर सका। आयोग ने पाया कि बैंक के पास ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं था, जिससे यह साबित हो सके कि खाताधारक को खाता निष्क्रिय होने से पहले समुचित सूचना या नोटिस दिया गया था।
इसी आधार पर आयोग ने बैंक को सेवा में लापरवाही और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन का दोषी माना। आयोग ने आदेश दिया कि बैंक शिकायतकर्ता को 1.03 लाख रुपये, मानसिक पीड़ा के एवज में 10 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 25 हजार रुपये का भुगतान करे। यह फैसला उन लाखों बैंक ग्राहकों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके खाते बिना पर्याप्त सूचना के निष्क्रिय कर दिए जाते हैं। आयोग ने स्पष्ट संकेत दिया कि किसी भी खाताधारक के अधिकारों की अनदेखी कर बैंक मनमाने तरीके से कार्रवाई नहीं कर सकते और सेवा में लापरवाही की स्थिति में उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।
पटना से अंजलि की रिपोर्ट